कुंभ में मौनी अमावस्या पर हुए हादसे पर पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महराज ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में विफलता तो थी। केवल घोषणा के बल पर आदमी नियंत्रित हो जाएगा, ऐसा सोचा गया। लोगों ने घोषणा का अनुपालन नहीं किया। लोग लेटे और सोए हुए थे, भगदड़ की चपेट में आकर निधन हो गया। मुख्यमंत्री जी ने दुख व्यक्त किया, यहां तक कि रोने लग गए।
यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। इससे सबक लेना चाहिए, सतर्कता का परिचय देना चाहिए। केवल घोषणा के बल पर नहीं, भावुकता के वशीभूत होकर अध्यात्म में मनोरंजन का अतिक्रमण न करें। दुर्घटना न हो, इसके लिए सावधान होने की आवश्यकता है। यह तय किया कि कोई उपद्रव न हो।
भविष्य में होने वाले अमृत स्नान के लिए कहा कि अमृत स्नान वालों ने संयम का परिचय दिया है। वह जानते हैं कि उपद्रव न हो। मैं शंकराचार्च हूं। मैंने मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान किया, ताकि मेरे कार्य की वजह से कोई घटना न हो। गंगा, यमुना या संगम में स्नान भावना की प्रकटता से करें। गंगा यमुना की संगम स्थल पर त्रिवेणी है।
शाही स्नान से संतों ने विवेकपूर्ण तरीके से स्वयं को रोककर रखा, ताकि उपद्रव न हो जाए। जनता में तो आस्था है, जनता को घटना को सूचना पहुंच गई, घायलों और मरने वालों की भी, फिर भी धैर्य का परिचय देते हुए स्नान किया। यह हिंदुओं की स्थिति है कि घटना घटने के बाद भी श्रद्धा में कमी नहीं आती।
प्रशासन द्वारा घटना में मृतकों को संख्या चाहिए जाने के आरोप पर होने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी। व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। मृतकों को मुआवजा भी दिया जाएगा। ईश्वर मृतकों के परिजनों को दुख सहन करने के लिए धैर्य और जान गंवाने वालों को सद्गति प्रदान करें। अब यह प्रयास किए जाएं कि आगे ऐसी घटना न हो।