वह आखिरी सांस तक सनातन धर्म के का संरक्षण, संवर्धन के लिए संघर्ष करते रहे। चाहे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन रहा हो या फिर शिरडी साईं मंदिर और ईस्कान मंदिर विवाद, वह हमेशा सनातनी हिंदू समाज के विकास और रक्षा के लिए संघर्षरत रहे। उन्होंने देश में हिंदू सनातन धर्म को बढ़ाने के लिए सैकड़ों आंदोलन भी किए। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज में बहुत गहरी रिक्तता आ गई है।
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री और पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरि ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आंदोलनों को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने हिंदू धर्म के प्रति श्रद्धालु भक्तों को जागरूक करते हुए सनातन परंपरा को बढ़ाने के लिए अनेक बड़े धार्मिक आयोजन और कार्यशालाएं आयोजित कीं। उन्होंने विश्व विख्यात महाकुंभ में देश-विदेश के संतों-भक्तों के बीच सनातन धर्म की धर्म ध्वजा को ऊंचा उठाते हुए मार्गदर्शन किया। इस मौके पर जूना अखाड़े के संत नारायण गिरि, निरंजनी अखाड़े के सचिव ओंकार गिरि, बाघंबरी गद्दी के महंत बलवीर गिरि समेत कई संतों ने शंकराचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित की।