शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का निधन
- फोटो : Social Media
2019 के कुंभ में जहां उन्होंने संगम की रेती पर धर्म संसद लगाकर राम मंदिर निर्माण को लेकर बिगुल फूंका, वहीं 2021 के माघ मेले में राम मंदिर का मॉडल प्रदर्शित कर अयोध्या में भूमि पूजन के लिए चार ईंट लेकर जाने का एलान कर कर प्रशासन की नींद उड़ा दी थी। तब प्रशासन ने उनको अयोध्या जाने से रोक दिया था।
वर्ष 2020 के कोरोना संक्रमण के अलावा 2022 के माघ मेले में अस्वस्था के कारण माघ मेले में मौनी अमावस्या पर डुबकी नहीं लगा सके थे। मनकामेश्वर मंदिर के व्यवस्थापक और उनके शिष्य श्रीधरानंद ब्रह्मचारी बताते हैं कि पहली बार 70 के दशक में प्रयागराज से ही उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का बिगुल फूंका था।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के साथ प्रियंका गांधी।
- फोटो : अमर उजाला
यमुना तट पर प्रियंका गांधी को हिंदू हित को ध्यान में रखकर काम करने का दिया था मंत्र
माघ मेले में सितंबर 2021 के प्रवास के दौरान कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी को शंकराचार्य स्वरूपानंद ने यमुना तट से हिंदू हित की सियासत से जुड़कर काम करने का संदेश दिया। तब प्रियंका अपनी बेटी मिराया के साथ शंकराचार्य का आशीर्वाद लेने मनकामेश्वर पहुंचीं थीं। तब प्रियंका की ओर से सियासी मार्गदर्शन का आग्रह किए जाने पर शंकराचार्य ने कहा था कि तुम्हारी दादी इंदिरा गांधी मुझसे आशीर्वाद लेने के लिए आती रही हैं। तुम्हारा परिवार मुझे गुरु मानता रहा है। तुमको बस, यही कहना चाहूंगा कि राजनीति में आगे बढ़ना है तो हिंदुओं के हितों को ध्यान में रखकर ही काम करो। इस देश में वही राज करेगा जो हिंदू हितों की बात करेगा। राज करना है तो हिंदुओं को साथ लेकर ही चलना होगा।