टीजीटी/पीजीटी के 4163 पदों पर भर्ती के लिए तकरीबन 13.19 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। इनकी संख्या समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा-2023 के अभ्यर्थियों की संख्या से काफी अधिक है।
अपने गठन के बाद नया शिक्षा सेवा चयन आयोग सबसे पहले सहायक अध्यापक (टीजीटी)/प्रवक्ता (पीजीटी) परीक्षा-2022 का आयोजन कराएगा। इस परीक्षा में केंद्र निर्धारण एवं पेपरों की सुरक्षा आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
विज्ञापन
टीजीटी/पीजीटी के 4163 पदों पर भर्ती के लिए तकरीबन 13.19 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। इनकी संख्या समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा-2023 के अभ्यर्थियों की संख्या से काफी अधिक है। आरओ/एआरओ परीक्षा के लिए 1076110 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। यह परीक्षा 11 फरवरी को प्रदेश के 58 जिलाें के 2387 केंद्रों में आयोजित की गई थी।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के इतिहास की यह सबसे बड़ी परीक्षा थी, लेकिन दोनों पालियों में प्रारंभिक परीक्षा शुरू होने से कुछ देर पहले पेपर व्हाट्सएप पर वायरल हो गए थे। पेपर वायरल होने के बाद अभ्यर्थियों ने आंदोलन किया और शासन को परीक्षा निरस्त करनी पड़ी। परीक्षा में केंद्र निर्धारण को लेकर काफी सवाल उठे थे। कई निजी स्कूल भी परीक्षा केंद्र बना दिए गए और उन केंद्रों में काफी अव्यवस्था भी थी।
विज्ञापन
पेपर लीक की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन अब तक की जांच के आधार पर यही अनुमान लगाया जा रहा है किसी केंद्र से पेपर वायरल हो सकता है। आरओ/एआरओ के मुकाबले टीजीटी-पीजीटी परीक्षा में ढाई लाख अभ्यर्थी अधिक होंगे। ऐसे में शिक्षा सेवा चयन आयोग को अधिक संख्या में केंद्र बनाने होंगे और केंद्र निर्धारण में विशेष सतर्कता बरतनी होगी।
पिछले दिनों आरओ/एआरओ के साथ पुलिस भर्ती परीक्षा में भी पेपर वायरल होने की घटना के कारण भर्ती संस्थाओं के लिए पेपरों की सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बढ़ गई हैं। ऐसे में शिक्षा सेवा चयन आयोग को भी इस चुनौती का सामना करना होगा। आयोग ने अभी टीजीटी/पीजीटी की परीक्षा तिथि घोषित नहीं की है। आयोग को नए अध्यक्ष का इंतजार है। लोकसभा चुनाव के बाद परीक्षा तिथि घोषित होने के आसार हैं।