मां कामाख्या ज्योतिष संस्थान, अखिल भारतीय पंडित सभा, सौदामिनी संस्कृत महाविद्यालय, श्री वेदाङ्ग संस्थान, हनुमत्संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कृष्णा कम्प्यूटर संस्थान और श्री निर्वाणमहाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को विद्वत् गोष्ठी का आयोजन किया गया। दारागंज स्थित श्री वेदाङ्ग संस्थान में हुई गोष्ठी में विद्वानों ने दीपावली 20 अक्तूबर को मनाने का निर्णय लिया। विद्वानों कहा कि शास्त्रीय सिद्धांत में दीपावली पर्व प्रदोष व्यापिनी अमावस्या में शुभ माना गया है। 20 अक्तूबर को अमावस्या है, जो प्रदोष व्यापिनी और रात्रि व्यापिनी भी है। इसलिए इस दिन दीपोत्सव मनाना उचित है।
विद्वनों के मुताबिक 20 अक्तूबर के दिन दोपहर 2:55 से 4:10 तक बजे तक कुंभ लग्न (स्थिर) में पूजन मुहूर्त शुरू होगा। शाम 4:10 से 5:35 तक मीन लग्र (द्विस्वभाव) में पूजन मूहूर्त रहेगा। शाम 5:15 से 6:05 बजे तक प्रदोषकाल रहेगा। शाम 7:15 से 9:10 तक वृष लग्र (स्थिर), रात 9: 10 से 11: 25 तक मिथुन लग्र (द्विस्वभाव) रहेगा।
रात 11 से 3 के बीच निशीथ काल होगा। इससे पहले धनतेरस 18 अक्तूबर को प्रदोष काल व्यापिनी त्रयोदशी में मनाई जाएगी। 19 अक्तूबर को नरक चतुर्दशी और हनुमत् जन्मोत्सव प्रदोष काल व्यापिनी चतुर्दशी में मनाया जाएगा। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा में मनाए जाने वाला अत्रकूट और गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को मनाया जायेगा।भातृ द्वितीया (भइया द्विज) 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
गोष्ठी में डॉ. बाबूलाल मिश्र, डॉ. शम्भुनाथ त्रिपाठी ''अंशुल जी, पं. अवध नारायण द्विवेदी, डॉ. राममिलन मिश्र, पंडित श्यामशंकर शुक्ल ''बोटी पंडित'', ब्रह्मानन्द मिश्र, पंडित चंद्रकान्त शुक्ल, पं. दीपू शुक्ला, पं. चूडामणि मिश्र, पं. द्वारिका प्रसाद पांडेय, राजेंद्र कुमार तिवारी, पं. ऋषि शुक्ला, पं. शुभांशु मिश्र, पं. सुनीत तिवारी और अरुण कुमार द्विवेदी सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।