केस-2 - धूमनगंज निवासी 17 वर्षीय किशोर को एक वेब सीरीज इतनी पसंद आई कि वह उसी में खुद को ढालने लगा। दबंगई पर बनी वेब सीरीज के किरदारों को उसने खुद के जीवन में ढाल लिया। किशोर हमेशा दबंगई के किरदार की भूमिका अदा करने लगता। इतना ही नहीं, हमेशा उसके पैंट में खिलौने वाली पिस्टल लगी रहती। वह प्रतिदिन इस वेब सीरीज को देखने लगा था। हद तो तब हो गई, जब वह घर से रुपये चुराकर वेब सीरीज की शूटिंग वाली लोकेशन पर जाने लगा। यह सिलसिला करीब एक साल तक चला। करीब 20 दिन पहले परिजन उसे मन कक्ष लेकर पहुंचे। जहां काउंसलिंग की गई तो पता चला कि वह ओसीडी का शिकार है। परिजनों के मुताबिक किशोर कक्षा आठ तक सही था, नौवीं जाते ही यह पढ़ाई से ज्यादा समय मोबाइल पर देने लगा था। घर से लेकर स्कूल तक वेब सीरीज के किरदारों की एक्टिंग करने लगा।
क्या है सिजोफ्रेनिया
सिज़ोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है। यह लोगों के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को प्रभावित करती है। इसमें मतिभ्रम, भ्रम, अव्यवस्थित सोच और व्यवहार का मिश्रण हो सकता है। मतिभ्रम में ऐसी चीजें देखना या आवाज़ें सुनना शामिल हैं, जो दूसरे नहीं देख सकते।
ओसीडी
ओसीडी में जुनून अवांछित, घुसपैठ करने वाले विचार या मानसिक छवियां हैं, जो तीव्र चिंता का कारण बनती हैं। ओसीडी वाले लोग इन विचारों को नियंत्रित नहीं कर सकते। ओसीडी वाले अधिकांश लोगों को अहसास होता है कि ये विचार अतार्किक या तर्कहीन हैं।
दोनों ही छात्रों का इलाज मन कक्ष में चल रहा है, जिसे ठीक होने में थोड़ा वक्त लगेगा। माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों से एक दोस्त की तरह बात करें और उनके मन की बातें जानें। क्योंकि,इस प्रकार की काल्पनिक दुनिया अकेलेपन के कारण बनती हैं। -डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक परामर्शदाता, कॉल्विन, प्रयागराज
सोशल मीडिया कनेक्शन की भावना प्रदान कर सकता है, यह अकेलेपन की भावना को भी बढ़ा सकता है। किशोर अपने साथियों की गतिविधियों में भाग लिए बिना आदर्श ऑनलाइन व्यक्तित्व प्रस्तुत करने के दबाव में संघर्ष करते हैं। - डॉ.ईशान्या राज, मनोवैज्ञानिक, कॉल्विन अस्पताल, प्रयागराज