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sawan 2020: सावन में पार्थिव शिवलिंग पूजन से पूरी होती है हर मनोकामना, जानें कौन सा मंत्र है फलदायी

Mon, 06 Jul 2020 11:18 PM IST
विनोद सिंह विनोद सिंह बघेल, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
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तुलसीदासजी ने लिखा, 'लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।। ' अर्थात शिवलिंग की स्थापना कर विधिवत उसका पूजन किया और बोले शिवजी के समान मुझे अन्य कोई प्रिय नहीं है।

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भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग पूजन का पुराणों में विशेष महत्व बताया गया गया है। अनेक विष्णु पुराण, शिव महापुराण सहित अनेक पुराणों और ग्रंथों में इस बात का उल्लेख है कि पार्थिव शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा कर हर मनोकामना पूरी का जा सकती है। 

भगवान शंकर की पूजा के लिए तो पूरा साल शुभ है लेकिन श्रावण मास में इसका महत्व कुछ अधिक ही बढ़ जाता है। सावन में पूजा करने से भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं। शिव महापुराण सहित अनेक वेद और पुराणों में भगवान शिव को प्रसन्न करने की तमाम विधियां बताई गई हैं, जिसमें जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, भस्म आरती आदि। इसी के सात पार्थिव शिवलिंग पूजन का विशेष महत्व बताया गया है।

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prayagraj news : Shiv mandir - फोटो : prayagraj

पुराणों के अनुसार कलियुग में सबसे पहले ऋषि कूष्मांड के पुत्र मंडप ने पार्थिव शिवलिंग की पूजा शुरू की थी। शिवपुराण के मुताबिक पार्थिव शिवलिंग की पूजा से धन-धान्य और पुत्र प्राप्ति का वरदान मिलता है। साथ ही साथ समस्त शारीरिक कष्टों से भी छुटकारा मिलता है। आगे शिवपुराण के अनुसार पूजन का क्या विधि है इस

prayagraj news - फोटो : prayagraj

पार्थिव शिवलिंग पूजन से होता है दुखों का नाश: शिवपुराण के मुताबिक पार्थिव शिवलिंग पूजन से दुःखों का नाश होता है। साथ ही साथ भक्त की समस्त मनोकामना पूरी होती है। इसके अलावा पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है। वहीं शिवपुराण कहता है कि जो मनुष्य पार्थिव शिवलिंग बनाकर इसका विधिपूर्वक पूजन करता है, उसे 10 हजार कल्प तक स्वर्ग में रहने का अवसर मिलता है। पार्थिव शिवलिंग का पूजन पुरुष और महिला दोनों ही कर सकते हैं। सावन में यदि रोजाना पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया जाए तो इहलोक और परलोक दोनों जगह विशेष शिव भक्ति प्राप्त होती है।

prayagraj news - फोटो : prayagraj

12 उंगली से ऊंचा न हो पार्थिव शिवलिंग: पार्थिव शिवलिंग पूजन के लिए पहले पार्थिव लिंग बनाएं। शिवलिंग बनाने के लिए मिट्टी, गाय का गोबर और भस्म का इस्तेमाल करें। पार्थिव शिवलिंग बनाने वक्त यह ध्यान रखना आवश्यक होता है कि यह 12 अंगुली से ऊंचा न हो। कहते हैं कि इससे अधिक ऊंचा होने पर पूजा का वास्तविक फल नहीं मिलता है। साथ ही इसे बनाने समय यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि बनाने वाले का मुंह पूरब या उत्तर दिशा में हो। इसके अलावा यदि कोई मनोकामना है तो शिवलिंग पर प्रसाद जरूर चढ़ाएं। शिवलिंग पर चढ़ाए गए प्रसाद को नहीं खाना चाहिए।

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prayagraj news - फोटो : prayagraj

सबसे पहले होती है भगवान गणेश की आराधना: पार्थिव शिवलिंग बनाने के बाद प्रथम पूज्य गणेश, भगवान विष्णु, नवग्रह और पार्वती जी का विधिवत आवाहन करना चाहिए। इसके बाद इनका विधिवत षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। पार्थिव शिवलिंग बनाने के बाद इसे ब्रह्म मानकर पूजन करना चाहिए। मान्यता है कि पूरे परिवार सहित पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से परिवार खुशहाल रहता है।

महामृत्युंजय मंत्र है विशेष फलदायी: पार्थिव शिवलिंग की पूजा के समय महामृत्युंजय और दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का कर सकते हैं। माना जाता है कि पार्थिव शिवलिंग के सामने महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

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