मेजा (इलाहाबाद)। उसकी मौत उनके लिए एक ‘खेल’ बन गई। तालाब में घिरे मानसिक रूप से निशक्त उस युवक पर चारों तरफ से पत्थरों की बरसात होती रही। बचने के लिए वह बार-बार में पानी में गोते लगाता और बाहर हैवान बनकर खडे़ लोग उसके निकलने का इंतजार करते। उसके पानी से सिर बाहर निकालते ही फिर से पत्थर बरसाने लगते। कई को मलाल रहता कि ओह, जरा सा चूक गए। पत्थर निशाने पर नहीं लगा। इंसान से जानवर बने कुछ लोगों का यह ‘खेल’ तब तक चलता रहा, जब जब तक कि वह मर नहीं गया। यह दृश्य आईएस के कब्जे वाले किसी इलाके का नहीं बल्कि अपने ही जिले के मेजा का है। जहां एक युवक की मौत को तमाशा बना दिया गया। ऐसा करने वाले भी कोई आतंकी या जल्लाद नहीं, इलाके के संभ्रांत लोग हैं। उसकी मौत का मजा लेने के बाद सभी अपने घर को चल दिए, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। दिल दहला देने वाली इस घटना में पुलिस ने पांच लोगों को नामजद किया है। अभी तक किसी को पकड़ा नहीं गया है।
मेजा के लोहारी गांव का राजित राम यादव (45) तीन भाइयों में बड़ा था। परिवार वालों के मुताबिक वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था। इसी के चलते उसकी शादी भी नहीं की गई थी। अपनी धुन में मस्त रहने वाले राजित की शायद ही कभी किसी से अनबन हुई हो। सोमवार दोपहर राजित रामनगर शीतलाधाम मंदिर दर्शन करने गया था। दर्शन कर बाहर निकल रहा था तभी गेट पर उसकी रामनगर के ही त्रिभुवन सिंह से टक्कर हो गई। जरा सी बात का बतंगड़ बनते देर नहीं लगी। राजित और त्रिभुवन के बीच कहासुनी के बाद मारपीट होने लगी। बताते हैं कि राजित ने त्रिभुवन के हाथ में दांत भी काट लिया। झगड़ा होते देख त्रिभुवन की तरफ से स्थानीय लोग दौड़ पड़े। थोड़ी ही देर में अच्छा-खासा हुजुम लग गया। हर तरफ से मारो-मारो की आवाज आने लगी। खुद को घिरता देख राजित राम भागा तो भीड़ ने उसे खदेड़ लिया। राजित को कहीं भी छिपने की जगह नहीं मिली। वह भागकर लगभग तीन सौ मीटर दूर एक तालाब में जाकर कूद गया। राजित को लगा कि शायद अब उसकी जान बच जाए मगर इसी तालाब पर तो उसकी मौत का तमाशा बनना था। राजित को भीड़ ने चारों तरफ से घेर लिया गया। थोड़ी ही देर में सभी के हाथों में पत्थर नजर आने लगे। फिर शुरू हुआ राजित को तड़पा-तड़पाकर मारने का खेल। वह जब भी पानी से बाहर सिर निकालता, पत्थरों की बौछार शुरू हो जाती। मार से बचने के लिए राजित फिर से गोता लगाता। सांस लेने का भी मौका नहीं मिलता। जरा देर के लिए ठहरता तो पत्थरों की मार से चीखें निकल जातीं। इस ‘खेल’ में वहां सबको मजा आ रहा था। काफी देर तक यह सबकुछ चला। पानी में लगातार डूबे रहने से राजित की हालत धीरे-धीरे खराब होने लगी। बेदम हो चुके राजित ने जब आखिरी डुबकी लगाई तो फिर बाहर नहीं निकला। तालाब किनारे हाथों में पत्थर लिए लोग उसका इंतजार करते रहे। जब उसकी मौत का इत्मीनान हो गया तब जाकर सभी वहां से हटे। उनके लिए मानो यह एक सामान्य घटना थी।
इधर किसी ने राजित के घरवालों को उसके साथ हुए वाकये की खबर दे दी। तब जाकर तो पुलिस को पता चला। अपनी जिंदगी बचाने के लिए तालाब में कूदे राजित की लाश ही बाहर निकली। तालाब के किनारे घरवाले रोते-बिलखते रहे। मां इंद्रकली और भाई मामूली विवाद में राजित को मार डालने से सकते में थे। भाई पंचम लाल की तहरीर पर त्रिभुवन, संजय केसरी, कुलई पाल, मंजेश और जगदीश केसरी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया। सीओ मेजा जीतेंद्र दुबे के मुताबिक इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा लिखा गया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।