अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल की मौजूदगी में शनिवार को हुई बैठक में सरस्वती हाईटेक सिटी के विकास का खाका तैयार किया गया। इसी क्रम में परिसर में आयात-निर्यात केंद्र खोलने का प्रस्ताव भी आया, जिसे शासन में रखा जाएगा।
सरस्वती हाईटेक सिटी को औद्योगिक क्लस्टर का दर्जा मिल चुका है और केंद्र सरकार की ओर से इसका विकास कराया जाएगा। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। इस निर्णय के बाद अपर मुख्य सचिव ने मंडलायुक्त कार्यालय में उद्यमियों संग पहली बैठक की और उनसे सुझाव मांगे। इसी क्रम में उद्यमियों ने सुझाया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं से भी आयात-निर्यात की सुविधा नहीं है। इसकी वजह से उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाना पड़ता है। उद्यमियों के इस प्रस्ताव पर अपर मुख्य सचिव भी सहमत दिखे। बैठक में उद्योग की दृष्टि से प्रशिक्षण दिए जाने का मुद्दा भी उठा। इसके लिए प्रशिक्षण संस्थान खोले जाने पर चर्चा हुई। उद्यमियों का कहना था कि इस संस्थान में उद्योग खोलने के लिए प्रशिक्षण दिया जाए।
क्योंकि नए उद्यमी एवं युवा उद्योग खोलने की प्रक्रिया और बाधाओं के बारे में नहीं जानते। इसकी वजह से उन्हें काफी परेशानी और नुकसान उठाना पड़ता है। उद्यमियों ने सड़क, बिजली, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी समेत अन्य मुद्दे भी उठाए, जिस पर अपर मुख्य सचिव ने स्थानीय अफसरों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव ने भी उद्यमियों के बीच औद्योगिक क्लस्टर के अंतर्गत होने वाले कार्यों तथा अन्य योजनाओं को रखा। उन्होंने उद्यमियों को आश्वस्त किया कि उनके सुझाव पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यूपीसीडा के सीईओ मयूर माहेश्वरी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार राय, क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदीप सत्यार्थी, उद्यमी जीएस दरबारी, अनिल अग्रवाल, जगदीश गुलाटी, राजीव नैयर आदि मौजूद रहे।
हाईटेक सिटी में कम नहीं होगी जमीन की कीमत
सरस्वती हाईटेक सिटी में जमीन की कीमत कम करने का मुद्दा अपर मुख्य सचिव के सामने भी उठा। उद्यमियों का कहना था कि यहां 9990 रुपये प्रति वर्गमीटर जमीन की कीमत रखी गई है। जबकि, आसपास के क्षेत्रों में आधी कीमत पर जमीन उपलब्ध है। हालांकि, इस पर अपर मुख्य सचिव सहमत नहीं रहे। उनका कहना था कि सरस्वती हाईटेक सिटी तथा आसपास के क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। इसके अलावा इसी कीमत पर जमीन की बिक्री भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब दाम में कटौती संभव नहीं है।
हर उद्योग के लिए अलग फीडर की मांग
बैठक में बिजली कटौती का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। उद्यमियों का कहना था कि कई फैक्ट्री में बिजली की अलग लाइन नहीं है। ऐसे में उनमें किसी तरह की खराबी पर पूरे क्षेत्र में शटडाउन लेना पड़ता है। इससे उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने हर कंपनी के लिए अलग फीडर का प्रावधान किए जाने की मांग की।
औद्योगिक क्षेत्र में कौन कराएगा काम इस पर सर्वे के बाद हो निर्णय
नैनी स्थित औद्योगिक क्षेत्र में विकास तथा मरम्मत कार्य नगर निगम कराएगा या यूपीसीडा इस पर निर्णय सर्वे के बाद होगा। नगर निगम में जाने का विरोध कर रहे उद्यमियों ने अपर मुख्य सचिव के सामने सर्वे कराने की यह मांग उठाई। उद्यमियों की इस मांग पर अफसरों का भी सकारात्मक रुख रहा। नैनी औद्योगिक क्षेत्र में मरम्मत तथा विकास कार्य अभी यूपीसीडा कराता है। इसके लिए यूपीसीडा मेंटेनेंस चार्ज भी लेता है लेकिन यह पूरा क्षेत्र नगर निगम की सीमा में आ गया है। इसके बाद नगर निगम की ओर से भी मेंटेनेंस चार्ज का नोटिस भेजा गया।
उद्यमियों की आपत्ति के बाद पूरे क्षेत्र को नगर निगम के हवाले करने का निर्णय लिया गया है लेकिन नया गतिरोध खड़ा हो गया। नगर निगम के अफसरों का कहना है कि यूपीसीडा सड़क की मरम्मत, नाली, सीवर आदि काम कराके दे या इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाए। इसके बाद ही औद्योगिक क्षेत्र को लेग। इसके अलावा उद्यमी भी औद्योगिक क्षेत्र को नगर निगम के हवाले करने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने अपर मुख्य सचिव के सामने भी यह मु्द्दा उठाया। उद्यमियों का कहना था कि अलग-अलग जिलों में नगर निगम तथा यूपीसीडा के हवाले यह जिम्मेदारी है। इसका सर्वे कराया जाए। उस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय लिया जाए। उद्यमियों ने मेंटेनेंस चार्ज कम किए जाने की भी मांग की।