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शामे गरीबां का मंजर बयां

Sun, 25 Oct 2015 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। दसवीं मुहर्रम पर शनिवार को पूरे दिन जुलूसों, मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। दरियाबाद कब्रिस्तान में अकीदत के फूलों को दफन करने के बाद आमाले रोजे आशूरा की नमाज अदा की गई। रानीमंडी, दरियाबाद आदि में बिजली गुल रखकर शामे गरीबां के मंजर को ताजा किया गया। लोबान की धूनी के साथ मोमबत्तियां जलाकर लोग चले। रास्ते भर ‘या सकीना, या अब्बास, हाय सकीना, हाय प्यास, या अबुल फ़ज़लिल अब्बास’ की सदाओं पर सीनाजनी, मातम किया गया। मखसूस अंदाज में नंगे पांव बुजुर्ग, औरतें, बच्चे सभी शरीक हुए।
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इमामबाड़ा अरब अली खां से निकला जुलूस कदीमी रास्तों से होता हुआ दरगाह हजरत अब्बास पहुंचकर पूरा हुआ, जहां मजलिस को डॉ.सैयद मुंतजिर मेहंदी ने खिताब किया। इसमें ओवैस मेहंदी, रौनक सफीपुरी, हसन नकवी, नन्नन जैदी, मिर्जा शिकोह अब्बास, मंजर शिकोह रिजवी, आदि शामिल थे। दरियाबाद में ही अमर हुसैन जैदी और फैजी की देखरेख में मास्टर मुस्तफा के इमामबाड़े से उठा जुलूस कब्रिस्तान तक गया, जहां पर मजलिस को बाकर अब्बास नकवी डॉ.अशरफ अब्बास ने खिताब किया। रानीमंडी स्थित इमामबाड़ा आबिदिया पर भी हुई मजलिस को मौलाना रजी हैदर ने खिताब किया। वहीं काजमी लाज में
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 भी नवाब असगर अब्बास के संयोजन में मजलिस हुई।
0 खिचड़ी खाकर की ‘फाका शिकनी’
शामे गरीबां के मंजर से पहले दिन भर के फाके को खिचड़ी, रोटी, साग आदि खाकर तोड़ा। इसी तरह इमामबारगाहों पर दूध के शरबत की नजर दिलाई गई।
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