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गंगा-गाय की रक्षा का मुद्दा सरकार के भरोसे न छोड़ें संत

Tue, 04 Feb 2020 12:50 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : प्रयागराज
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गंगा नहीं बची को भारतीय संस्कृति को बचाना मुश्किल हो जाएगा। इसी तरह गोरक्षा पर भी एकजुट होकर प्रयास किया जाना चाहिए। यह बातें सोमवार को अलोपीबाग स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर देवस्थान धर्मार्थ ट्रस्ट परिसर में आयोजित संत सम्मेलन में कही गई। इस दौरान संतों ने नागरिकता संशोधन कानून को राष्ट्रहित में सख्ती से लागू करने का सरकार से आग्रह किया। संतों ने कहा कि जिस भूमि पर गो माता का खून बहता है, वहां की सरकार को ही नहीं जनता को भी पाप का भागी बनना पड़ता है। ऐसे में गाय माता की रक्षा के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।
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दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण के बाद सम्मेलन आरंभ हुआ। सबसे पहले संतों ने सीएए केतहत पड़ोसी देश पाकिस्तान, बंग्लादेश, अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारत की नागरिकता प्रदान करने के केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया। इसके बाद जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि गोमाता की रक्षा ही हिंदू हित की रक्षा है। जिस भूमि  पर गोवंश का खून बहेगा, वहां केराजा को ही नहीं प्रजा को भी पाप का भागी बनना पड़ता है। इसलिए सिर्फ सरकार केभरोसे गोमाता को नहीं छोड़ना चाहिए। स्वामी घनाश्यामाचार्य महाराज ने कहा कि आजादी के पहले लाखों हिंदुओं को देश के अलग-अलग हिस्सों से पलायन करना पड़ा था।

अब उनके दिन फिरने का समय आ गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने सीएए का विरोध करने वालों को चेताया कि वह इस कानून पर समाज में भ्रम फैलाने से बाज आएं। इस दौरान संतों ने गंगा की निर्मलता के लिए भी ठोस कदम उठाने का आह्वान किया। इस मौके पर कृष्णाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, हरिचैतन्य ब्रह्मचारी, योगाचार्य आनंद गिरि, आचार्यबाड़ा के अध्यक्ष स्वामी रामेश्वराचार्य, स्वामी श्रीधराचार्य अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम और स्वामी चक्रपाणि महाराज ने गंगा, गाय की रक्षा का संकल्प लिया।
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