इसको बेवजह तूल दिया जा रहा है। उनको संन्यास व साध्वी की कोई पदवी नहीं दी गई। उन्होंने सिर्फ गुरु दीक्षा ली है। जिस तरह हजारों अनुयायियों ने स्नान किया, उसी तरह उन्होंने भी स्नान किया। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। - आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि, निरंजनी अखाड़ा
मैं कोई साध्वी नहीं हूं। साध्वी के लिए दीक्षा भी नहीं ली है। मैंने सिर्फ गुरु दीक्षा ली है। सनातन के काम को आगे बढ़ाना चाहती हूं। मुझे आध्यात्म की दुनिया अच्छी लगती है। इस वजह से यहां आई हूं। - हर्षा रिछारिया