लॉकडाउन और अब उसके बाद अनलॉक में परिवहन निगम को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। बसों का टैक्स बचाने के लिए अब विभाग ने आरटीओ में बसों को सरेंडर करना शुरू कर दिया है। अब तक प्रयागराज रीजन द्वारा 78 बसों को सरेंडर किया जा चुका है। आने वाले दिनों में कुछ और बसें भी सरेंडर की जा सकती हैं। दरअसल जनता कर्फ्यू यानी कि 22 मार्च से 31 मई तक चले लॉकडाउन में परिवहन निगम को लंबा घाटा सहना पड़ा।
अनलॉक होने के बाद 1 जून से सेवाएं शुरू हुई लेकिन बसों में अभी तक 50 फीसदी ही लोड फैक्टर हो पाया है। रोडवेज की एसी बसों को भी नाम मात्र की ही यात्री मिल रहे हैं, इस वजह से रोडवेज ने इन बसों का परिचालन थोड़ा कम कर दिया है। लखनऊ जाने वाली वोल्वो बस शुरू की गई लेकिन कम सवारी मिलने की वजह से यह सेवा भी बंद चल रही है। इन सभी बसों का प्रतिमाह टैक्स आरटीओ में रोडवेज को जमा करना होता है। विभाग को लगातार वर्कशॉप में खड़ी बसों का भी टैक्स जमा करना पड़ रहा है।
पिछले माह रोडवेज द्वारा 36 बसों का सरेंडर किया गया था। ताकि इनका टैक्स ना जमा करना पड़े। इस बीच रोडवेज ने इस माह भी अपनी कई बसों का सरेंडर कर दिया है। इस तरह से अब तक प्रयागराज रीजन की 78 बसें सरेंडर कर दी गई हैं। इस बारे में रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक टीकेएस बिसेन का कहना है कि अनलॉक होने के बाद अब तक 78 बसें सरेंडर की जा चुकी हैं। बसों का लोड फैक्टर भी अभी 50 फीसदी तक ही पहुंचा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय उन रूटों पर ही ज्यादा बसें चलाई जा रही हैं, जहां यात्री मिल रहे हैं।