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Ro-Aro Exam : यूपीपीएससी ने की थी इंटरनेट सेवा बंद करने की सिफारिश, पर्याप्त जैमर नहीं थे उपलब्ध

Thu, 22 Feb 2024 07:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पर्याप्त संख्या में जैमर उपलब्ध न होने के कारण आयोग ने शासन को प्रस्ताव भेजा कि जिन जिलों में प्रारंभिक परीक्षा प्रस्तावित है, वहां परीक्षा वाले दिन इंटरनेट सेवा बंद कर दी जाए। राजस्थान लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में ऐसा किया जाता है।
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UPPSC - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2023 के दौरान इंटरनेट सेवा बंद रखने के लिए शासन को सिफारिश भेजी थी। हालांकि, आयोग का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। आयोग को प्रस्ताव इसलिए भेजना पड़ा था, क्योंकि परीक्षा केंद्रों की संख्या काफी अधिक होने के कारण पर्याप्त संख्या में जैमर उपलब्ध नहीं हो सके थे।

इससे पूर्व आयोग ने वर्ष 2021 में आरओ/एआरओ भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, जिसमें 354 पदों के लिए 559155 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे और प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रदेश के 22 जिलों में 1214 केंद्र बनाए गए थे। वहीं, आरओ/एआरओ परीक्षा-2023 के लिए 1076004 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए, जो वर्ष 2021 के मुकाबले तकरीबन दोगुने हैं।

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ऐसे में आयोग को प्रारंभिक परीक्षा के लिए दोगुने केंद्रों की व्यवस्था करनी पड़ी। 11 फरवरी 2024 को हुई प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रदेश के 58 जिलों में 2387 केंद्र बनाए गए थे। आयोग के पास स्टाफ और संसाधन उतने ही हैं, जितने वर्ष 2021 की परीक्षा में थे। आयोग के सूत्रों का कहना है कि केंद्रों की संख्या इतनी अधिक थी कि हर केंद्र में मोबाइल फोन जैमर का इस्तेमाल कर पाना संभव नहीं था।

 

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राजस्थान में किया जाता है जैमर का उपयोग


सूत्रों के अनुसार पर्याप्त संख्या में जैमर उपलब्ध न होने के कारण आयोग ने शासन को प्रस्ताव भेजा कि जिन जिलों में प्रारंभिक परीक्षा प्रस्तावित है, वहां परीक्षा वाले दिन इंटरनेट सेवा बंद कर दी जाए। राजस्थान लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में ऐसा किया जाता है। हालांकि, शासन इसके लिए तैयार नहीं हुआ, क्योंकि इससे आम लोगों को दिक्कत हो सकती थी।

वहीं, आयोग अपने इतिहास की सबसे बड़ी परीक्षा कराने जा रहा था और उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा का सफल संचालन था। आयोग ने परीक्षा से हफ्ते भर पहले सभी 58 जिलों के नोडल अफसरों के साथ बैठक भी की थी। वहीं, आयोग से प्रस्ताव मिलने के बाद परीक्षा केंद्रों पर निगरानी भी बढ़ा दी गई थी लेकिन परीक्षा से कुछ देर पहले पेपर व्हाट्सएप पर वायरल हो जाने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आयोग की तमाम कोशिशों के बावजूद परीक्षा अब संदेह के घेरे में है।

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