इलाहाबाद (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की आरओ-एआरओ-2014 प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। लगातार विवादों से बने दबाव के बाद आयोग ने श्रेणीवार पदों की संख्या तथा सफल अभ्यर्थियों का विवरण जारी किया है। इसमें ओबीसी के 163 पद के लिए 4059 अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किए गए हैं। जबकि, नियमानुसार 2934 अभ्यर्थी ही सफल होने चाहिए। इस तरह से कम से कम 1126 अभ्यर्थियों ने कटऑफ के बराबर यानी, 142 नंबर प्राप्त किए हैं। इस पर भी अभ्यर्थियों ने कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया है कि विशेष जाति को उपकृत करने के लिए आयोग ने इस तरह का नया तरीका खोजा है।
भर्तियों में एक विशेष जाति के अभ्यर्थियों को तवज्जो देने तथा पदों में हेरफेर के आरोप से आयोग पर दबाव बढ़ गया है। इसके मद्दनेजर आयोग ने आरओ-एआरओ-2014 प्रारंभिक परीक्षा में शामिल पदों का श्रेणीवार विवरण दिया है। आयोग ने बताया है कि 2004 में 19 जून को हुए निर्णय के तहत प्रारंभिक परीक्षा में पद के 18 गुना अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल किए जाते हैं। नियमानुसार आखिरी नंबर पर यदि एक से अधिक अभ्यर्थी हैं तो सभी को सफल घोषित किया जाएगा। इस बार खास यह है कि सामान्य और ओबीसी का कटऑफ बराबर-बराबर 142 अंक है। आयोग ने बताया कि इस भर्ती में सामान्य के 306 और ओबीसी के 163 पद हैं। सामान्य के 306 पद के लिए नियमानुसार 5508 अभ्यर्थी सफल होने चाहिए।
जबकि, सफल अभ्यर्थियों की संख्या 5797 है। इस तरह से आखिरी नंबर पर कम से कम 290 अभ्यर्थी हैं। जबकि, ओबीसी के कम से कम 1126 अभ्यर्थियों को कटऑफ के बराबर यानी, 142 अंक मिले हैं। अनुसूचित जाति के 134 पद के लिए 2412 के बजाय 2514 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इस तरह से अनुसूचित जाति के 103 अभ्यर्थियों को कटऑफ के बराबर 128 अंक मिले हैं। एसटी के पांच पद के लिए 90 के बजाय 97 अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए हैं। इस भर्ती के तहत आरओ-एआरओ के अन्य पदों के लिए भी ओबीसी के अपेक्षाकृत अधिक अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इस पर प्रतियोगियों की ओर से घोर आपत्ति जताई गई है। अवनीश पांडेय, अयोध्या सिंह, अशोक पांडेय आदि का कहना है कि ओबीसी के आखिरी नंबर पर 1100 से अधिक अभ्यर्थियों का होना चौंकाने वाला है। आयोग ने विशेष जाति के अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए नया रास्ता अख्तियार किया है।