कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा कि किसी की भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बिना कानूनी प्राधिकार से छीनी नहीं जा सकती। बालिग जोड़े को अपनी मर्जी से एक साथ रहने का सांविधानिक अधिकार है। सरकार का दायित्व है कि वह उनके इस अधिकार की सुरक्षा करे। बालिगों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने तथा साथ रहने का अधिकार है। उन्हें इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।