इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा के मुद्दे पर आंदोलन में शामिल छात्र नेताओं तथा अन्य छात्रों के भविष्य का फैसला रिटायर जज के नेतृत्व में बनी कमेटी करेगी। कार्यपरिषद की मंगलवार को हुई आकस्मिक बैठक में निर्णय लिया गया कि कमेटी की निगरानी में शिक्षकों को धमकी, बदसलूकी, वित्तीय अनियमितता समेत सभी तरह के आरोपों की जांच होगी। कमेटी आरोपी छात्र नेताओं तथा अन्य विद्यार्थियों से भी उनका पक्ष सुनेगी। एक महीने के भीतर कमेटी रिपोर्ट सौंप देगी। कार्यपरिषद के सदस्यों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा को सही ठहराया। इसके अलावा अनुशासनहीनता पर अंकुश के लिए बनी नियमावली को भी मंजूरी दे दी।
कार्यपरिषद की बैठक ‘छात्रों में बढ़ती अनुशासनहीनता’ के मुद्दे पर बुलाई गई थी। बैठक का निर्णय सोमवार की शाम को लिया गया था। ऐसे में बाहर के सदस्य शामिल नहीं हो सके। बैठक में विश्वविद्यालय और कालेजों के अध्यापक, प्राचार्य ही शामिल रहे। डीन आर्ट्स प्रोफेसर ए.सत्यनारायण ने ग्लोबलाइजेशन के प्रोफेसर वीपी सिंह और छात्रसंघ अध्यक्ष से खुद को खतरे की लिखित शिकायत की है। गृह विज्ञान की हेड प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने भी छात्रसंघ पदाधिकारियों समेत 40 लोगों के खिलाफ अभद्रता की शिकायती की है। इस मामले में एफआईआर भी लिखाई गई है। इसके अलावा डीएसडब्ल्यू ने आंदोलन के दौरान परिसर में अराजकता से संबंधित रिपोर्ट दी है। सभी दस्तावेज बैठक में रखे गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आयोजन को लेकर छात्रसंघ की ओर से दिए गए बिल को फर्जी बताया है।
इससे संबंधित पूरी फाइल भी सदस्यों के समक्ष रखी गई। बैठक में रिटायर जज की निगरानी में जांच कराने का निर्णय लिया गया। सदस्यों ने यह भी कहा कि आरोपी छात्र नेताओं तथा अन्य विद्यार्थियाें का भी पक्ष सुना जाए। कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने बताया कि छात्रसंघ पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप हैं। कई छात्र ऐसे हैं जिन पर पूर्व में निलंबन समेत अन्य कार्रवाई हो चुकी है। इसके बाद भी परिसर में अराजकता वाली गतिविधियों में वे शामिल हैं। सभी मामले गंभीर है। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। कमेटी एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। कुलपति की अध्यक्षता में हुई बैठक में रजिस्ट्रार तथा कई अन्य शिक्षक शामिल रहे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू की मार्कशीट पर ही सवाल उठ गया है। यूजीसी की प्रारंभिक रिपोर्ट में डिग्री को फर्जी बताया गया है। एक-दो दिन में यूजीसी की एक और रिपोर्ट आनी है। विश्वविद्यालय प्रशासन को उस पत्र का इंतजार है। इसके बाद एडमिशन रद्द करने तथा अन्य कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
गोलू ने पूर्वोत्तर के किसी विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। इस डिग्री के फर्जी होने की शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सत्यापन के लिए यूजीसी को पत्र लिखा गया था। कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने बताया कि यूजीसी से एक रिपोर्ट आ चुकी है। इसमें डिग्री फर्जी होने की बात कही गई है। यह रिपोर्ट कार्यपरिषद की आपात बैठक में भी रखी गई। उन्होंने बताया कि यूजीसी की ओर से एक और रिपोर्ट बुधवार को आनी है। उससे स्थिति एकदम स्पष्ट हो जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।