बहुचर्चित जवाहर हत्याकांड के मामले में विवेचना के दौरान लापरवाही के आरोप में विवेचक रहे रिटायर्ड डिप्टी एसपी प्रदीप कुमार वर्मा पर मुकदमा दर्ज किया गया है। सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। इसमें न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की गई। मामले की अब सीबीसीआईडी ही विवेचना करेगी।
रिपोर्ट सीबीसीआईडी प्रयागराज के इंस्पेक्टर उमाशंकर त्रिपाठी की तहरीर पर दर्ज की गई है। इसमें बताया गया है कि रिटायर्ड डिप्टी एसपी प्रदीप कुमार वर्मा फरवरी 2000 में सीबीसीआईडी वाराणसी में निरीक्षक के पद पर तैनात थे। उन्होंने उदयभान करवरिया व अन्य पर हत्या, हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में दर्ज मामले की विवेचना भी की थी। इस दौरान उन्होंने लखनऊ जेल में निरुद्ध आरोपी मायाशंकर का बयान दर्ज किया था।
तहरीर में यह भी बताया गया है कि न्यायालय के अनुसार उपरोक्त बयान झूठा व मनगढ़ंत था, जिसे विवेचक ने अभियुक्तों को फायदा पहुंचाने व पीड़ित पर प्रतिकूल प्रभाव पहुंचाने की नीयत से विवेचना में न सिर्फ दर्ज किया, बल्कि इसे कोर्ट में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत भी किया, जोकि आईपीसी की धारा 166ए (बी) व 218 के तहत अपराध है। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिटायर्ड डीएसपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी की ओर से नियुक्त विवेचक ही करेंगे।
क्या था बयान में
सिविल लाइन थाने में दी गई तहरीर में बताया गया है कि विवेचक ने लखनऊ जेल में बंद अभियुक्त माया शंकर का बयान विवेचना में अंकित किया था। बयान के मुताबिक, ‘जुलाई 1996 में जवाहर जायसवाल पर पुलिस लाइन चौराहे के पास हरिहर सिंह वगैरह ने जानलेवा हमला किया था, जिसमें उसे भी फंसा दिया गया। हमले के दिन ही जवाहर यादव जो जवाहर जायसवाल के मित्र थे, ने उन लोगों को गाली देते हुए धमकाया था। जिसके बाद 13 अगस्त 1996 को बंसी सिंह, पांचू सिंह, हरिहर सिंह और मायाशंकर ने जवाहर उर्फ पंडित की सिविल लाइंस में कार से जाते समय हत्या कर दी थी।’ बयान के वक्त यह भी बताया था कि बंसी और पांचू का एनकाउंटर हो गया, जबकि हरिहर फरार है। बाद में न्यायालय ने बयान को झूठा व मनगढ़ंत करार दिया।