लैब में नैनो सेल्युलोज दिखाते एमएनएनआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर अंकुर गौड़ व शोधार्थी सजल अग्रवाल।
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इन नतीजों से सिविल इंजीनियरिंग विभाग भी काफी उत्साहित है। डॉ. गौड़ के मुताबिक, कंक्रीट ही किसी इमारत को बांधे रखता है। जब हम नैनो सेल्युलोज को कंक्रीट के मिश्रण में मिलाते हैं तो यह अप्रत्याशित रूप से मजबूती हासिल कर लेता है। इससे इमारत की आयु भी बढ़ती है। यह भूकंप और दैवीय आपदा से जुड़े खतरों को भी घटाने में मददगार है।
अम्लीय वर्षा से भी होगी सुरक्षा
नैनो सेल्युलोज अम्लीय वर्षा से इमारतों को होने वाले दुष्प्रभाव को भी बचाएगा। दरअसल, अम्लीय वर्षा का सबसे ज्यादा प्रभाव इमारत के ढांचे पर पड़ता है। इससे कमजोर हुए भवनों के ढहने का खतरा बढ़ जाता है।
कंक्रीट में नैनो सेल्युलोज डालने से उसकी टेंसाइल और कंप्रेसिव स्ट्रेंथ बढ़ती है। टेंसाइल स्ट्रेंथ जितनी अधिक होगी इमारत में दरारें भी उतनी ही कम पड़ेंगी। गन्ने की खोई से निकाला गया सेल्युलोज प्राकृतिक होने के कारण इससे किसी तरह का कोई नुकसान भी नहीं है। - प्रो. एलके मिश्रा, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, एमएनएनआईटी