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हाईकोर्ट का आदेश : सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद ही लोक प्राधिकारी पर चल सकता है मुकदमा

Fri, 09 Aug 2024 02:30 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा ने राजेंद्र सिंह वर्मा की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी को सुनने के बाद यह आदेश दिया। याची राजेंद्र सिंह वर्मा बीएसएनल बुलंदशहर में डिप्टी जनरल मैनेजर थे। 18 दिसंबर 2016 को उनके और जीएम बीएसएनल बुलंदशहर रामविलास वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीबीआई ने केस दर्ज किया।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी लोक प्राधिकारी के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अभियोजन स्वीकृति ही मान्य है। यदि अभियोजन स्वीकृति देने वाला प्राधिकारी इसके लिए सक्षम नहीं है तो मुकदमे की कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती है। कोर्ट ने इसी आधार पर बीएसएनएल बुलंदशहर के डिप्टी जनरल मैनेजर राजेंद्र सिंह वर्मा और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत गाजियाबाद में चल रही मुकदमे की कार्यवाही को रद्द कर दिया है।

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न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा ने राजेंद्र सिंह वर्मा की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी को सुनने के बाद यह आदेश दिया। याची राजेंद्र सिंह वर्मा बीएसएनल बुलंदशहर में डिप्टी जनरल मैनेजर थे। 18 दिसंबर 2016 को उनके और जीएम बीएसएनल बुलंदशहर रामविलास वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीबीआई ने केस दर्ज किया। सीबीआई ने जांच के बाद 12 फरवरी 2017 को स्पेशल कोर्ट सीबीआई गाजियाबाद में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। कोर्ट ने संज्ञान ले लिया।

याची सरकारी अधिकारी थे, इसलिए उन पर अभियोग चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति अनिवार्य थी। सीबीआई ने डायरेक्टर (एचआर)बीएसएनएल नई दिल्ली से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की। सीबीआई कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए मुकदमे की कार्यवाही प्रारंभ की। याची की डिस्चार्ज अर्जी को खारिज कर दी।

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मुकदमे की सुनवाई के दौरान याची की ओर से सीबीआई कोर्ट में यह आपत्ति दाखिल की गई कि निदेशक एचआर उनके विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है। सीबीआई अदालत ने यह अर्जी खारिज कर दी जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि याची, जिस वेतनमान पर कार्यरत है, उसके नियुक्ति और अनुशासन प्राधिकारी चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर है। इसलिए निदेशक एचआर से प्राप्त की गई अभियोजन स्वीकृति अवैध है। याची और सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि बीएसएनएल की सेवा नियमावली की शर्तों के अनुसार डायरेक्टर एचआर अभियोजन स्वीकृति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है। कोर्ट ने समस्त आपराधिका कार्रवाई रद्द कर दी।
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