मुकदमे की सुनवाई के दौरान याची की ओर से सीबीआई कोर्ट में यह आपत्ति दाखिल की गई कि निदेशक एचआर उनके विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है। सीबीआई अदालत ने यह अर्जी खारिज कर दी जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि याची, जिस वेतनमान पर कार्यरत है, उसके नियुक्ति और अनुशासन प्राधिकारी चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर है। इसलिए निदेशक एचआर से प्राप्त की गई अभियोजन स्वीकृति अवैध है। याची और सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि बीएसएनएल की सेवा नियमावली की शर्तों के अनुसार डायरेक्टर एचआर अभियोजन स्वीकृति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है। कोर्ट ने समस्त आपराधिका कार्रवाई रद्द कर दी।