विदेश यात्रा के लिए लेनी होगी अनुमति
याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी कि वह नौसेना में अधिकारी है। बिना पासपोर्ट के वह अपनी नौकरी नहीं कर सकता। सीजेएम की अदालत में लंबित आपराधिक मुकदमा लंबे समय तक चलेगा। ऐसे में नवीनीकृत पासपोर्ट जारी करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाना अति-आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि विदेश मंत्रालय की 1993 की अधिसूचना के मुताबिक आपराधिक कार्यवाही लंबित रहने के दौरान नागरिकों को पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, बशर्ते वह विदेश यात्रा के लिए न्यायालय की अनुमति प्राप्त करें। मौजूदा मामले में याची पर लगाए गए आरोप जघन्य या गंभीर प्रकृति के नहीं हैं और वह जमानत पर है। मिली जमानत की शर्तों में ऐसी कोई बात नहीं है कि वह विदेश यात्रा नहीं कर सकता।
कोर्ट ने सशर्त याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट में याची को यह सिद्ध करना होगा कि चोरी हुआ उसका पासपोर्ट बरामद नहीं हुआ है। साथ ही याची को यह हलफनामा देना होगा कि विदेश यात्रा से पूर्व वह ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेगा और हर तारीख पर अदालत में हाजिर रहेगा। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए सीजेएम का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही पासपोर्ट प्राधिकारी को याची के आवेदन पर नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया है।