मालूम हो कि इसके पहले कोर्ट ने विपक्षी अधिवक्ताओं से पूछा था कि चुने गए जनप्रतिनिधि को कैसे नोटिस जारी कर दी गई और वह भी उप जिला मजिस्ट्रेट के जरिए? सिराथू की विधायक पल्लवी पटेल के निर्वाचन को लेकर हुई शिकायत के मामले में जारी नोटिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर तीखी नाराजगी जाहिर की थी। कोर्ट ने कहा था कि एक चुने गए प्रतिनिधि के खिलाफ कैसे नोटिस जारी कर दी?
वह भी एक उप जिला मजिस्ट्रेट के जरिए। आयोग ने खुद क्यों जांच नहीं की। वह उप जिला मजिस्ट्रेट से क्यों जांच करा रहा है? क्या आयोग का इरादा जनप्रतिनिधि का उत्पीड़न किए जाने का है? कोर्ट ने निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता से पूछा था कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है, उसके पास चुनाव से जुड़े मामले की जांच करने के लिए खुद ही शक्ति है। वह कैसे उप जिला मजिस्ट्रेट को यह काम सौंप सकता है।
आयोग की तरफ से कोर्ट को बताया गया था कि याची के खिलाफ आयोग के समक्ष यह शिकायत आई कि उन्होंने अपने नामांकन के दौरान हलफनामे में आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई है। आयोग ने उस शिकायत का संज्ञान लेते हुए उप जिलामजिस्ट्रेट को जांच के आदेश दिए। उपजिला मजिस्ट्रेट ने याची से उनका पक्ष जानने के लिए नोटिस जारी की है। इस पर कोर्ट ने तीखी नाराजगी जताई थी।
उधर, विधायक पल्लवी पटेल की ओर से तर्क दिया गया था कि याची के खिलाफ शिकायत एक सियासी साजिस के तहत की गई है। याची 2022 के विधानसभा चुनाव में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हराकर चुनाव जीती है। इस वजह से उसके खिलाफ इस तरह की शिकायत कर उत्पीड़न किया जा रहा है।