शुरूआत में थे लाल रंग के कोच
प्रयागराज एक्सप्रेस की जब शुरूआत हुई थी तब इसमें लाल रंग के कोच थे। तब ट्रेन में एक भी एसी कोच नहीं थे। तीन कोच फर्स्ट क्लास के थे। इसके अलावा चार जनरल एवं आठ कोच स्लीपर श्रेणी के थे। वर्ष 2003 में उत्तर मध्य रेलवे के गठन के बाद इसमें पुराने कोचों को बदलकर नीले रंग के कोचों को लगाया गया। 18 दिसंबर 2016 को प्रयागराज एक्सप्रेस को एलएचबी रैक से लैस किया गया। इसके बाद इस वर्ष लगे कुंभ मेले के पूर्व इसके कोचों पर मेला थीम पर आधारित विनायल रैपिंग की गई।
पहले सफर में शीतला प्रसाद थे कंडक्टर
प्रयागराज एक्सप्रेस का शुरूआत से अब तक दोनों ओर से आवागमन जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर ही हो रहा है। इसके पहले सफर में कंडक्टर के रूप में जंक्शन से शीतला प्रसाद श्रीवास्तव गए थे। उन्होंने बताया कि शुरूआत में स्लीपर का किराया करीब 115 रुपये तथा फर्स्ट क्लास का किराया 400 रुपये से अधिक था। ट्रेन के 35 वर्ष पूरे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भी वह टिकट चेकिंग टीम को लीड कर रहे थे। इस दौरान जंक्शन पर हुए कार्यक्रम में ट्रेन के पहले सफर के गार्ड प्रताप सिंह, टिकट चेकिंग स्टाफ विजय मोहन दुबे, डीएन सक्सेना, विदित तिवारी, अजय गुप्ता, एमपी सिंह, राम सिंह आदि को भी सम्मानित किया गया गया था।