याची के अधिवक्ता राघवेन्द्र प्रसाद मिश्र ने दलील दी कि याची की कृषि भूमि है। बैनामे के बाद याची को कम स्टाम्प का नोटिस दे कर व्यवसायिक दर पर बकाया स्टाम्प शुल्क ब्याज समेत जमा करने को कहा गया। इस पर याची ने अपील दाखिल की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कृषि या रिहायशी भूमि के भविष्य में व्यावसायिक होने की संभावना के आधार पर स्टाम्प शुल्क की वसूली नहीं की जा सकती। यह आदेश न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने अलीगढ़ निवासी अनुपम वार्ष्णेय व चार अन्य की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने जमा कराई गई राशि को एक माह के भीतर चार फीसदी ब्याज समेत वापस करने का निर्देश दिया है।
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याची के अधिवक्ता राघवेन्द्र प्रसाद मिश्र ने दलील दी कि याची की कृषि भूमि है। बैनामे के बाद याची को कम स्टाम्प का नोटिस दे कर व्यवसायिक दर पर बकाया स्टाम्प शुल्क ब्याज समेत जमा करने को कहा गया। इस पर याची ने अपील दाखिल की।
कहा कि राजस्व अधिकारियों ने उसकी गैरमौजूदगी में स्थलीय निरीक्षण किया है। नियमानुसार स्टाम्प जमा किया गया है। मौके का मुआयना कर रिपोर्ट दी जाए, लेकिन अपील खारिज कर दी गई। स्थायी अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जमीन का मूल्यांकन व्यावसायिक दर पर किया गया है। लिहाजा, लिया गया स्टॉप शुल्क वैध है। कोर्ट ने अपीलीय अधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया।