अगर आपसे पैसे लेकर कोई ब्लैक एंड व्हाइट यानी सादा वोटर आईकार्ड बनाकर देता हो सतर्क रहें। ब्लैक एंड व्हाइट वोटर आईकार्ड बनना लोकसभा चुनाव-2014 से ही बंद है। यानी हाल-फिलहाल आपको मिला ब्लैक एंड व्हाइट वोटर आईकार्ड फर्जी है। लोकसभा चुनाव में मंगाए गए होलोग्राम बड़ी संख्या में बच गए थे। ये होलोग्राम तहसीलों में रखे गए थे और अब फर्जीवाड़ा करने वाले असली होलोग्राम को नकली वोटर आईकार्ड के साथ लगाकर बेच रहे हैं।
निर्वाचन आयोग अब केवल रंगीन वोटर आईकार्ड बनाकर देता है। यहां तक कि जो ब्लैक एंड व्हाइट कार्ड काफी पुराने हैं, उनके गुम हो जाने या संशोधन कराने पर भी उनके बदले रंगीन वोटर आईकार्ड बनाकर दिए जा रहे हैं। यह व्यवस्था लोकसभा चुनाव-2014 से ही लागू है लेकिन चुनाव से पहले ब्लैक एंड व्हाइट कार्ड ही बनाए जाते थे। इन कार्ड्स के लिए निर्वाचन आयोग की ओर से बड़ी संख्या में होलोग्राम भेजे गए थे। जिला प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक होलोग्राम तहसीलों में वितरित करा दिए गए, क्योंकि तब तहसीलों में ही वोटर आईकार्ड बनाए जा रहे थे। इसी बीच रंगीन वोटर आईकार्ड बनाए जाने शुरू कर दिए गए, सो पुराने होलोग्राम बड़ी संख्या में तहसीलों में ही डंप पड़े रह गए।
अब ये होलोग्राम तहसीलों से बाहर आ गए हैं और नकली वोटर आईकार्ड में इन्हें लगाकर मोटी कमाई की जा रही है। अगर इस पर नियंत्रण नहीं लगा तो आगामी विधानसभा चुनाव में फर्जी मतदान से निपटना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। अफसरों को भी मालूम हैं कि जिले भर में यह फर्जीवाड़ा चल रहा है। कुछ माह पहले हुए पंचायत चुनाव के दौरान यमुनापार में बड़ी संख्या में फर्जी वोटर आईकार्ड और कार्ड बनाने की मशीन पकड़ी गई थी। इसके बावजूद प्रशासन नहीं चेता और फर्जी वोटर आईकार्ड बनाने का काम खुलेआम जारी है।
‘इस बात की जांच कराई जाएगी कि पुराने होलाग्राम कहां गए। अगर शिकायत सही पाई जाती है तो फर्जी वोटर आईकार्ड बनाने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’ डीएम पांडेय, एडीएम प्रशासन एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी