2004 में फूलपुर से चुनाव जीतकर पहुंचा संसद
पांच बार विधायक बनने के बाद 2004 में उसने फूलपुर संसदीय सीट से बतौर सपा प्रत्याशी चुनाव लड़ा और पहली बार में ही लोकसभा का सदस्य बन गया। हालांकि, यह वही साल था, जिसमें हुए उपचुनाव में राजू पाल ने माफिया के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ को हराकर शहर पश्चिमी की सीट उससे छीन ली। शहर पश्चिमी सीट पर हुई इस हार को महज चुनाव में मिली हार नहीं बल्कि अतीक ने अपनी बेइज्जती समझी और इसके तीन महीने बाद ही राजू पाल की हत्या कर दी गई। राजूपाल की हत्या अतीक के सियासी सफर के ताबूत की आखिरी कील साबित हुई। नतीजा यह हुआ कि इसके बाद अतीक कभी कोई चुनाव नहीं जीत पाया।
एक विधानसभा, तीन लोकसभा चुनावों में मिली पटखनी
राजू पाल की हत्या के बाद अतीक ने एक विधानसभा और तीन लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमाई लेकिन हर बार उसे पटखनी मिली। 2009 में उसने प्रतापगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उसे शिकस्त का सामना करना पड़ा। 2014 में उसने सपा के टिकट पर श्रावस्ती से दांव आजमाया लेकिन वहां भी हार ही मिली। 2019 में उसने वाराणसी संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उसे बुरी तरह शिकस्त का सामना करना पड़ा।