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मेरे कहने पर ही खुलवाया था राजीव गांधी ने राममंदिर का ताला: स्वरूपानंद

Sat, 06 Jan 2018 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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माघ मेले में पखवारा भर के प्रवास पर मनकामेश्वर मंदिर पहुंचे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अमर उजाला संवाददाता सरिता से बातचीत के दौरान बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने राम मंदिर, महाराष्ट्र, मनु स्मृति आदि विवादित मुद्दों पर कई ऐसे बयान दिए जो नई बहस को जन्म दे सकते हैं। साथ ही उन्होंने विहिप और आरएसएस को भी घेरा। केंद्र सरकार पर निशाना साधा और साफ कहा कि देश में धर्म और जाति की राजनीति हो रही है, जिससे माहौल बिगड़ रहा है।  
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प्र. राम मंदिर बनेगा या इस बार भी राजनीतिक मुद्दा बन कर रह जाएगा?
उ. अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने को लेकर किए जा रहे प्रयास महज अवसरवादी हैं। शुरुआत में कुछ संतों ने मंदिर में ताला खोलने के लिए अनशन करने की चेतावनी दी थी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मुझसे सलाह लेकर मंदिर का ताला खुलवाया। जब मंदिर का तला खुल गया तो आरएसएस और विहिप ने विजय जुलूस निकाल दिया। इसके बाद ध्रुवीकरण की राजनीति शुरू हो गई और अयोध्या का मुद्दा विश्वव्यापी बन गया, जबकि पहले यह सिर्फ अयोध्या का मुद्दा था। विहिप के ही आंदोलन के बाद मंदिर-मस्जिद का मामला खड़ा हो गया और तब से यह मुद्दा ही बना हुआ है।

प्र. आरएसएस प्रमुख अयोध्या में आदर्श राममंदिर चाहते हैं। आप कितना सहमत हैं?
उ. अब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अयोध्या में आदर्श राममंदिर बनाने की बात कह रहे हैं, जबकि राम आदर्श पुरुष तब बने जब वह विश्वामित्र के साथ गए, माता-पिता का कहना माना और प्रजा की सेवा की। मैं भी चाहता हूं कि अयोध्या में राम मंदिर बने, लेकिन ‘आदर्श’ राम के बजाय व्यापक ब्रह्म राम का मंदिर बनना चाहिए। इस पर राजनीति बंद होनी चाहिए।
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प्र. आप भी राम मंदिर के लिए प्रयासरत हैं, कोर्ट भी गए हैं।
उ. सुप्रीम कोर्ट में हमारी संस्था राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से पूरे परिसर (विवादित भूमि) का दावा किया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में रामजन्म भूमि को तीन हिस्से में बांट दिया है। हमें अहम दस्तावेज मिले हैं। एक मुसलमान शासक ने कहा है कि यदि मस्जिद न रहे तो उसके एवज में मुआवजा लेकर मुसलमान कहीं दूसरी जगह मस्जिद बनाकर इबादत करें। अंग्रेजी राज के समय कई पत्थर भी मिले हैं, जिसमें राम चौकी होने की बात है। आरएसएस एवं विहिप ने खेल कर गर्भगृह में राममूर्ति भी नहीं स्थापित की। उनके द्वारा स्थापित मूर्ति गर्भगृह से 192 फीट दूर है।

प्र. मनु स्मृति फिर विवादों में है। क्या इसका विरोध सही है?
उ. सांसद उदित राज और बीएसपी प्रमुख मायावती द्वारा मनुस्मृति की खिलाफत करना और प्रतियां जलाए जाने की घटनाएं अफसोसजनक हैं। हम भले ही अपने आपको मनु की संतान न मानें, लेकिन मनु द्वारा बनाए गए नियमों की वजह से ही हमारे रिश्ते हैं। मनु ने ही पति-पत्नी, पुत्र सहित सभी रिश्तों के कर्तव्यों को बताया है। उन्होंने अपने आप को सच्चा हिंदू धर्म का अगुवा बताया है।

प्र. विहिप द्वारा मेले में धर्म संसद आयोजित होनी है। इसको कितना गंभीर मानते हैं?
उ. विहिप द्वारा आयोजित होने वाली धर्म संसद का कोई मतलब नहीं है। ऐसी धर्म संसदों से हिंदू धर्म का स्वरूप ही बिगड़ेगा। देश में जैसे कोई कानून तब तक लागू नहीं होता जब तक उस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर न हों। इसी प्रकार धर्म संसद का तब तक कोई मतलब नहीं होता जब तक उसमें कोई शंकराचार्य न हो।

प्र. महाराष्ट्र में जो रहा है, उस पर क्या कहेंगे?
उ. महाराष्ट्र में हो रहे जातीय झगड़े सरासर गलत हैं। वोट की राजनीति में ये झगड़े कराए जा रहे हैं। धर्म और जाति के नाम पर राजनीति करने वाले देश का माहौल बिगाड़ रहे हैं। लोग असुरक्षित हैं। अपने फायदे के लिए आम जनता को सांसत में डाला जा रहा है।

प्र. मेला प्रशासन की ओर जमीन नहीं दिए से आप नाराज होंगे...?
उ. सरकार ही नहीं चाहती मैं मेले में जाऊं, तभी तो जमीन नहीं दी गई। लेकिन मैं गंगा को नहीं छोड़ूंगा और सनातन धर्म की रक्षा करता रहूंगा। गंगाजल हमेशा अविरल निर्मल रहे। सिर्फ माघ मेले में ही स्वच्छ जल क्यों दिए जाने का दावा किया जाता है। सरकार गंगा के लिए कुछ नहीं कर रही। योगी आदित्यनाथ जब सीएम की शपथ लेने जा रहे थे तो उन्होंने मुझसे फोन पर आशीर्वाद लिया था। तब कहा था कि गोहत्या बंद करवा देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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