बंगला (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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दरअसल रेलवे के सीनियर अफसरों को एक खास सुविधा मिलती है। वह सुविधा है टेलीफोन अटेंडेंट कम डाक खलासी (टीएडीके) की। रेलवे ने इस प्रथा पर विराम लगाने का फैसला किया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस बारे में रेलवे बोर्ड ने दो दिन पहले ही एक चिट्ठी जारी कर सभी जोनल रेलवे के जीएम को भेज दिया है।
बता दें कि टीकेडीऐ यानी कि अफसरों को घर में काम करने के लिए 24 घंटे का एक नौकर मिल जाता है। कुछ जोनल रेलवे में इसे बंगलो पियून भी कहा जाता है। इसकी भर्ती के लिए कोई परीक्षा नहीं होती। रेल अधिकारी जिसे चाहे भर्ती कर लेते हैं और वह रेलवे का कर्मचारी बन कर साहब के बंगले पर घरेलू काम करता है। आम तौर पर 3 साल तक वह साहब के घर पर काम करता है।
उसके बाद उसे रेलवे के आफिस, या वर्कशॉप आदि में तैनात कर दिया जाता है। एक अफसर अपने कार्यकाल के दौरान कुल दो बंगला पियून रख सकता है। अब उनसे यह अधिकार छीना जा रहा है। चर्चा है कि कुछ अफसरों ने रेलवे बोर्ड में यह मसला दोबारा रीप्रेजेंट करने को कहा है। बता दें कि एनसीआर जोन के आगरा, प्रयागराज एवं झांसी मंडल में इस तरह के 200 से ज्यादा बंगला खलासी हैं। इसमें 100 के आसपास तो केवल प्रयागराज में ही है।