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गजब : पीडब्ल्यूडी ने टेंडर किया डेढ़ किमी का, ठेकेदार ने तीन गांव के चार स्थानों पर बनाई 1280 मीटर की सड़क

Mon, 29 Jul 2024 05:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

टुकड़ों में बनी 1280 मीटर की सड़क के नाम पर 90 लाख रुपये निकाल लिए गए। शिकायत होने व गर्दन फंसने पर लीपापोती में जुटे अफसर व ठेकेदार ने 220 मीटर बची हुई सड़क के निर्माण को पूरा कराने की कवायद में जुट गए हैं।
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भवानीपुर गांव में फैलाई गई मिट्टी व गिट्टी।। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सड़क निर्माण में भष्ट्राचार का आरोप लगाते हुए समाजसेवी ने पीडब्ल्यूडी के अफसर व ठेकेदार के खिलाफ सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। विभाग ने बीते फरवरी माह में 112.17 लाख की लागत से टीकापुर-खैरुआ पाल बस्ती के लिए डेढ़ किमी लंबी नई सड़क निर्माण के लिए टेंडर जारी किया। अफसरों की मिलीभगत से निरंकुश हुए ठेकेदार ने मानक को दर किनार कर पाल बस्ती के विपरीत चार अलग-अलग स्थानों पर डामरीकरण कर सड़क का निर्माण करा दिया। 

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टुकड़ों में बनी 1280 मीटर की सड़क के नाम पर 90 लाख रुपये निकाल लिए गए। शिकायत होने व गर्दन फंसने पर लीपापोती में जुटे अफसर व ठेकेदार ने 220 मीटर बची हुई सड़क के निर्माण को पूरा कराने की कवायद में जुट गए हैं। जिसके लिए गांव के दो अलग-अलग मजरे में जेसीबी मशीन लगाकर करीब चार सौ मीटर में मिट्टी व गिट्टी पटाई का कार्य कराया जा चुका है और सड़क काली करने की युद्धस्तर पर तैयारी है। जबकि न्यायालय के स्थगन आदेश पर भवानीपुर गांव में गिट्टी फैलाने के बाद सड़क निर्माण का कार्य अधूरे में छोड़ दिया गया। जिसको लेकर ग्रामीणों में उहापोह की स्थित उतपन्न हो गई है और लोकनिर्माण के मनमाने हरकत को लेकर तरह-तरह की चर्चा वयाप्त है।

सीएम पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी शिकायत

समाजसेवी श्रीकांत शुक्ल ने सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी विभाग ने बीते फरवरी-मार्च माह में डेढ़ किमी लंबी सड़क निर्माण के लिए 112.17 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृति करते हुए टेंडर जारी किया। मांडा ब्लॉक क्षेत्र के टीकापुर गांव से खैरुआ पाल बस्ती तक नई सड़क निर्माण के लिए प्राकलन जारी किया। उक्त सड़क निर्माण का ठेका सुरेश यादव की फर्म को स्वीकृति किया गया। आरोप है कि सड़क का निर्माण मानक को दरकिनार कर किया जा रहा है।

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खैरुआ पाल बस्ती में सड़क निर्माण के लिए फैलाई गई मिट्टी। - फोटो : अमर उजाला।
जिला पंचायत की सड़क के ऊपर शुरू कर दिया निर्माण

ठेकेदार ने सबसे पहले करीब 750 मीटर सड़क का निर्माण टिकापुर गांव निवासी द्वारिकाधीश मिश्रा के घर से तुलाराम शुक्ला के घर तक करा दिया। जबकि उक्त मार्ग को जिला पंचायत निधि से पहले बनाया गया था और उसी पर डामरीकरण कर दिया गया। जिसके बाद ठेकेदार ने करीब 130 मीटर की दूसरी सड़क का निर्माण खैरुआ गांव निवासी छविनाथ यादव के घर से इंद्रमणि पाल के घर तक करा दिया। निर्मित दोनों सड़क की आपस मे दूरी करीब ढाई सौ मीटर बताई जा रही है।

तीसरी सड़क खौरुआ गांव निवासी सम्पूर्णनंद पांडेय के घर से रामनिहोर पाल के खेत तक करीब 270 मीटर बनाई गई है। उक्त निर्माण भी दूसरी सड़क से करीब 200 मीटर की दूरी पर मौजूद है। चौथी सड़क निर्धारित स्थल से करीब एक किलो मीटर दूर भवानीपुर गांव निवासी जयप्रकाश शुक्ल के घर से मंगला शुक्ल के घर तक 130 मीटर बनाई गई। पांचवीं सड़क का निर्माण टीकापुर गांव निवासी अवधेश शुक्ला के घर से भवानीपुर गांव निवासी कमलाशंकर शुक्ला के घर तक कराए जाने के लिए मिट्टी व गिट्टी पटाई का कार्य किया गया। लेकिन न्यायालय का स्थगन आदेश होने के चलते सड़क निर्माण को रोक दिया गया।

टीकापुर गांव में जिलापंचायत द्वारा निर्मित की गई सड़क को लोकनिर्माण विभाग ने पुनः डामरीकरण करा दिया। - फोटो : अमर उजाला।
लीपापोती में जुटे हैं अफसर

जिसके बाद धांधली की शिकायत सीएम पोर्टल पर की गई। वहीं लीपापोती में जुटे अफसर व ठेकेदार ने छठवीं सड़क खैरुआ गांव निवासी रामनिहोर पाल के खेत से राम लखन पाल के खेत तक करीब 200 मीटर दूरी तक जेसीबी मशीन से मिट्टी पटाई का कार्य करा दिया। इतना ही नहीं सातवीं सड़क के लिए भवानीपुर गांव निवासी मंगला शुक्ल के घर से  रविनाथ मिश्र के खेत तक करीब 200 मीटर में मिट्टी व गिट्टी पटाई का कार्य करा दिया।
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खैरुआ गांव में बनी नव निर्मित सड़क। - फोटो : अमर उजाला।
स्वीकृति डेढ़ किमी की सड़क को तीन गांवों के सात अलग-अलग स्थानों पर बनाए जाने को लेकर ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चा व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और खैरुआ पाल बस्ती तक सड़क निर्माण कराए जाने की मांग की। मामले लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता अरशद खान ने बताया कि लोगों को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए सड़क का निर्माण कराया गया है। नवनिर्मित सड़क एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और एक ही ग्राम पंचायत के अलग-अलग मजरे में बनाई गई हैं।
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