प्रयागराज से अरबों रुपये का प्रोजेक्ट वापस हो गया है। जमीन नहीं मिलने की वजह से कनौडिया ग्रुप वापस हो गया है। इससे सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीदों को भी झटका लगा है। ग्रुप की ओर से अब अमेठी में फैक्ट्री खोलने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि वहां उसे जमीन भी मिल गई है। सीमेंट फैक्ट्री खोलने का प्रस्ताव भेजने वाली एक अन्य संस्था सांची एजेंसी की भी जमीन की तलाश अभी पूरी नहीं हो सकी है।
डॉ.रीता बहुगुणा जोशी के सांसद बनने के बाद भले ही नैनी इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जगी है लेकिन जमीन मिलने में बाधा को देखते हुए नए उद्योगों की राह अभी आसान नहीं दिख रही। पिछले वर्ष दिसंबर में लखनऊ में हुए निवेशकों के सम्मेलन के बाद कई उद्योग घरानों ने यहां फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव दिया। इसी क्रम में कनौडिया ग्रुप ने यहां सीमेंट की फैक्ट्री का प्रस्ताव दिया था। कंपनी की ओर से शुरू में ही 250 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव भेजा गया लेकिन जमीन ही नहीं मिली। इसलिए ग्रुप ने अब अमेठी में फैक्ट्री खोलने का निर्णय लिया है।
उपायुक्त उद्योग अजय चौरसिया का कहना है कि कनौडिया ग्रुप ने प्रयागराज के अलावा आसपास के जिलों को भी विकल्प के तौर पर चुन रखा था। उन्हें अमेठी में जमीन मिल गई है। इसी तरह से सांची एजेंसी ने मांडा में सीमेंट की फैक्ट्री खोलने की योजना बनाई है। संस्थान को न्यूनतम 60 से 70 बीघा जमीन चाहिए लेकिन अभी तक एक तिहाई ही जमीन उपलब्ध हो पाई है। हालांकि यह समस्या जल्द दूर होने की बात कही जा रही है। सांची एजेंसी के अजय अग्रवाल का कहना है कि मांडा में किसानों से बात की जा रही है। एक से डेढ़ महीने में जमीन मिल जाने की उम्मीद है। उनका कहना है कि जमीन मिलने के बाद फैक्ट्री के निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।
कनौडिया ग्रुप की ओर से खोली जाने वाली सीमेंट की फैक्ट्री में सीधे तौर पर 300 अफसरों और कर्मचारियों की नियुक्ति होनी थी। साथ ही मजदूरों को भी रोजगार मिलता। इसके अलावा फैक्ट्री के आसपास अन्य रोजगार के भी दावे किए जा रहे थे लेकिन अब प्रोजेक्ट के वापस होने से इन उम्मीदों को झटका लगा है।
उद्योग विभाग का आकार और बड़ा होने जा रहा है। इसमें खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, हथकरघा तथा रेशम विभाग को इसमें मर्ज करने की तैयारी है। इसका प्रस्ताव भेजा जा चुका है। तीनों विभागों की ओर से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने वाली योजनाएं चलाई जाती हैं लेकिन इनकी संख्या कम है। इसके अलावा संभावनाएं भी सीमित हैं। इसलिए इन्हें उद्योग विभाग में मर्ज करने की योजना बनाई गई है। उपायुक्त उद्योग अजय चौरसिया ने बताया कि इसका प्रस्ताव भेजा गया है।