खुद ही पहुंचे अस्पताल
प्रो. एनबी सिंह ने बताया कि कोबरा को सुरक्षित रखने के बाद उन्होंने उंगली के उस हिस्से को डोरी से बांध दिया, जहां कोबरा ने काटा था। इसके बाद उन्होंने वहां चीरा लगाकर जहर भी बाहर निकालने की कोशिश की। इस दौरान करीब 47 मिनट उन्हें अस्पताल पहुंचने में लग गए। वहां उन्हें भर्ती कराया गया। समय से उपचार मिलने के बाद उनकी हालत में सुधार आ गया है।
एनबी सिंह के मुताबिक अब तक वह एक हजार से अधिक सांपों को पकड़ चुके हैं। इनमें 25 अजगर भी शामिल हैं। 68 वर्षीय सेवा निवृत्त प्रोफेसर का कहना है कि पहली बार जब वह एमएससी फर्स्ट ईयर के छात्र थे तब 1979 में उन्हें कोबरा ने डंस लिया था। तब भी वह समय पर उपचार मिलने से बच गए थे। इससे पहले कोबरा के दंश से उनकी बड़ी बहन की मौत हो चुकी है।
आज वन कर्मियों की मदद से जंगल में छोड़ा जाएगा कोबरा
प्रोफेसर एनबी सिंह ने कोबरा पकड़ने की जानकारी प्रभागीय वन निदेशक महावीर कलावजी को भी दी है। बृहस्पतिवार को वन कर्मियों की मदद से इस कोबरा को जंगल मेें छोड़ा जाएगा।