शर्ली का कहना था कि चयन समिति में शामिल सदस्यों की ओर से प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति को अवैध बताए जाने के बाद बैंक ने पारुल सोलोमन के हस्ताक्षर से खाता संचालन पर रोक लगा दी। खाता सीज़ कर दिया। शर्ली ने आरोप लगाया कि इसके के बाद से पारुल सोलोमन ने कुछ कर्मियों और अपने पिरवार के सदस्यों की मिली भगत से कर्मचाररों के पीएफ और बच्चों की फीस की रकम में हेराफेरी शुरू कर दी।
पारुल क्रमचारियों को वेतन कुछ देती थीं और हस्ताक्षर किसी ओर पर कराती थीं। इतना कर्चारियों के पीएफ मद का करोड़ो रुपए का गबन कर लिया गया है। प्रबंध समिति बदल जाने पर जब इसकी शिकायत की गई, तब जांच में सभी आरोप सही पाए गए। इसके बाद पारुल को प्रधानाचार्य पद से बर्खास्त कर दिया गया था।