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प्रयागराज : सखियों को उम्मीद, पीएम मोदी ही बदलेंगे महिलाओं की तकदीर

Mon, 20 Dec 2021 04:56 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज

सार

मातृशक्ति के महाकुंभ में पीएम से सफलता की कहानी साझा करना चाहती हैं अपने पैरों पर खड़ीं महिलाएं। कोरोना काल में 22 लाख रुपये के बिलों की वसूली करने वाली बिजली सखी संजू और शीला को पीएम से बेहतरी की आस।
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पीएम मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सहारे की लाठी छोड़कर अपने पैरों पर खड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 21 दिसंबर को परेड मैदान में होने वाले संवाद को लेकर बेहद उत्साहित हैं। चाहे अनाज बैंक चलाने वाली सखियां हों या बिजली बिलों की वसूली से आत्मनिर्भरता की राह चुनने वाली गरीब परिवारों की महिलाएं, हीनता और जड़ता को तोड़कर उन्होंने अपनी बेहतरी की राह खुद बनाई है।

 

अब मातृशक्ति के इस महाकुंभ में पीएम से मिलकर वह अपनी कामयाबी की कहानियां साझा करने के लिए बेताब हैं। पीएम के इस दौरे से उन्हें महिलाओं के जीवन की तकदीर और तस्वीर दोनों में बदलाव आने की उम्मीद है।

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पीएम मोदी के संवाद कार्यक्रम के लिए चुनी जाने वाली महिलाओं में सोरांव के शीतला आजीविका स्वयं सहायता समूह की संचालिका संजू देवी मौर्या भी शामिल हैं। संजू महिला समूहों के तौर पर जिले में मिसाल के तौर पर उभरी हैं। उन्होंने गांव में रहकर भी पीएम के डिजिटल इंडिया के नारे को साकार किया है। जून 2019 में समूह बनाने वाली संजू ने डिजिटल प्लेटफार्म पर काम करने को वॉलेट रिचार्ज के लिए 30 हजार रुपये का ऋण लिया था।  

आत्मनिर्भर महिलाएं पीएम को बताना चाहती हैं अपनी कहानी
उन्होंने इस योजना के जरिए मुनाफा कमाकर ऋण का तो भुगतान कर ही दिया, अब 60 हजार रुपये सालाना उनकी आमदनी है। संजू विद्युत सखी के तौर पर भी जिले में कोरोना काल से लेकर अब तक सबसे अधिक 22 लाख रुपये के बिलों की वसूली कर नंबर वन रही हैं। वह पीएम से मिलकर अपनी कामयाबी की कहानी बताना चाहती हैं, ताकि उन्हें गांव की महिलाओं की सोच और उनके साहस का पता चल सके।

इसी तरह पार्वती आजीविका समूह के जरिए संगीता पटेल अनाज बैंक चला रही है। इस बैंक के माध्यम से उन्होंने सैकड़ों परिवारों की आजीविका संभाल रखी है। संगीता पीएम के इस दौरे को लेकर उत्साहित हैं। उनको उम्मीद है कि पीएम मोदी इस बार प्रयागराज में महिलाओं के लिए कुछ ऐसी सौगात दे सकते हैं, जिससे उनकी तकदीर और तस्वीर दोनों बदल सकती है।

इसी तरह उजाला स्वयं सहायता समूह बनाने वाली शीला यादव ने भी विद्युत सखी के तौर पर बिलों की वसूली के एवज में मिलने वाले पारिश्रमिक से परिवार चला रही हैं। वह पीएम के कार्यक्रम में अपने गांव के समूहों की 45 महिलाओं को लेकर पहुंचेंगी। शनिवार को पीएम के हाथों सम्मानित होने के लिए पास जारी होने के बाद इन महिलाओं की खुशी का ठिकाना नहीं रह गया है। 
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सखियों के हाथ कृषि-बीमा से लेकर बैंक तक की कमान
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ये महिलाएं प्रशिक्षण लेकर अपने समुदायों की अगुवा बन गई हैं। इनमें कृषि सखी, पशु सखी, बैंक सखी, बीमा सखी, बैंक संवाद सखी, बिजली सखी शामिल हैं। उजाला आजीविका स्वयं सहायता समूह की शीला यादव बताती हैं कि इन समूहों से जुड़ी महिलाओं को शक्ति संपन्न भी बनाया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से घरेलू हिंसा, महिला शिक्षा और लैंगिक असमानता, पोषण, स्वच्छता, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक बनाया जा रहा है, ताकि उनकी उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो सके।
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