आत्मनिर्भर महिलाएं पीएम को बताना चाहती हैं अपनी कहानी
उन्होंने इस योजना के जरिए मुनाफा कमाकर ऋण का तो भुगतान कर ही दिया, अब 60 हजार रुपये सालाना उनकी आमदनी है। संजू विद्युत सखी के तौर पर भी जिले में कोरोना काल से लेकर अब तक सबसे अधिक 22 लाख रुपये के बिलों की वसूली कर नंबर वन रही हैं। वह पीएम से मिलकर अपनी कामयाबी की कहानी बताना चाहती हैं, ताकि उन्हें गांव की महिलाओं की सोच और उनके साहस का पता चल सके।
इसी तरह पार्वती आजीविका समूह के जरिए संगीता पटेल अनाज बैंक चला रही है। इस बैंक के माध्यम से उन्होंने सैकड़ों परिवारों की आजीविका संभाल रखी है। संगीता पीएम के इस दौरे को लेकर उत्साहित हैं। उनको उम्मीद है कि पीएम मोदी इस बार प्रयागराज में महिलाओं के लिए कुछ ऐसी सौगात दे सकते हैं, जिससे उनकी तकदीर और तस्वीर दोनों बदल सकती है।
इसी तरह उजाला स्वयं सहायता समूह बनाने वाली शीला यादव ने भी विद्युत सखी के तौर पर बिलों की वसूली के एवज में मिलने वाले पारिश्रमिक से परिवार चला रही हैं। वह पीएम के कार्यक्रम में अपने गांव के समूहों की 45 महिलाओं को लेकर पहुंचेंगी। शनिवार को पीएम के हाथों सम्मानित होने के लिए पास जारी होने के बाद इन महिलाओं की खुशी का ठिकाना नहीं रह गया है।