दिल्ली अब दूर नहीं, जल्द ही शहर के मेधावियों को राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में पढने के लिए दूसरे महानगरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को झलवा में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए शिलान्यास करने जा रहे हैं। 25 एकड़ क्षेत्रफल में यह विश्वविद्यालय बंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ यूनिवर्सिटी की तर्ज पर खोला जाएगा।
हालांकि विधि विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा 18 साल पहले आठ जनवरी 2003 को हुई थी। तब प्रदेश भाजपा और बसपा की संयुक्त सरकार थी। उस वक्त शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्र्क स्थित पब्लिक लाइब्रेरी में प्रदेश विधानसभा की विशेष बैठक में विधि विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की गई थी। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी की पहल पर यह बैठक बुलाई गई थी। इस घोषणा के सात माह बाद 29 अगस्त 2003 को भाजपा के समर्थन वापस लेने से मायावती की सरकार जाने के साथ घोषणा भी खटाई में पड़ गई थी।
अब 18 साल बाद यह योजना जमीन पर उतरने जा रही है और प्रयागराज के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। इस विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश होंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कुलाधिपति होंगे और वही कुलपति की नियुक्ति करेंगे। विश्वविद्यालय में महापरिषद, कार्य परिषद, शैक्षिक परिषद और वित्तीय समिति का गठन किया जाएगा। महापरिषद को विश्वविद्यालय के बारे में फैसला लेने का सर्वोच्च अधिकार होगा। विश्वविद्यालय में विधि के पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के साथ शोध की सुविधा भी होगी। पहले चरण में विश्वविद्यालय में 80 सीटों पर दाखिले होंगे।
निर्माण पर खर्च होंगे 220 करोड़ रुपये
विश्वविद्यालय के निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड-1 को सौंपी गई है। निर्माण खंड-1 के जूनियर अभियंताओं की टीम मौके पर लगा दी है। इसके निर्माण में कुल 220 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत विश्वविद्यालय के मुख्य प्रशासनिक भवन के साथ छात्रों के लिए कक्षाएं, आठ सौ लोगों के एक साथ बैठने के लिए एक ऑडिटोरियम, शिक्षकों, कर्मचारियों के लिए अलग-अलग कई तरह के आवास, छात्र-छात्राओं के लिए अलग से हॉस्टल बनाए जाएंगे।