प्रयागराज कमिश्नरेट की पूरी एसओजी टीम भंग कर दी गई है। पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया के इस फैसले से महकमे में खलबली मची है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर टीम भंग किए जाने की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। पुलिस महकमे में चर्चा है कि मांडा में लंबे समय से चल रही अवैध ड्रग फैक्टरी की भनक स्थानीय पुलिस और एसओजी को नहीं लगने की वजह से ही कार्रवाई हुई है।
प्रयागराज में एसओजी की अलग-अलग टीम में कुल 44 पुलिसकर्मी शामिल थे। इनमें सेंट्रल जोन के 11, नगर जोन के 14, गंगानगर के 10 और यमुनापार के नौ पुलिसकर्मी शामिल थे। टीम को भंग किए जाने के बाद अब इन पुलिसकर्मियों को अलग-अलग थानों और अन्य जिम्मेदारियों में भेजे जाने की संभावना है। सूचना है कि इस प्रकरण में जल्द ही कुछ बड़ी कार्रवाई भी होगी। स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र की विफलता और लापरवाही की समीक्षा की जा रहा रही है।
एसओजी के सूचना तंत्र पर खड़े हुए सवाल
मांडा के ग्रामीण इलाके में आबादी से दूर शेड बनाकर सिंथेटिक ड्रग तैयार किए जाने का मामला मुंबई क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के बाद सामने आया। बताया जा रहा है कि यहां बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थ तैयार किए जा रहे थे। एसओजी का काम अपराध और अपराधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं जुटाना और गंभीर मामलों में स्थानीय पुलिस की मदद करना है। मांडा में लंबे समय से ड्रग फैक्टरी चलने और स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी न हो पाने से एसओजी के सूचना तंत्र पर सवाल खड़े हुए हैं। एसओजी भंग होने के बाद अब नए सिरे से टीम गठित की जाएगी। नई टीम में किन पुलिसकर्मियों को शामिल किया जाएगा, इस पर जल्द निर्णय होने की चर्चा है।