ध्वस्तीकरण से पहले नहीं दिया गया कोई नोटिस
याचिका में कहा गया है कि 10 जून की पत्थरबाजी व तोड़फोड़ की घटना के बाद उसी रात पुलिस ने उसके शौहर जावेद मोहम्मद पंप को थाने बुलाया और अवैध रूप से गिरफ्तार कर लिया। यही नहीं, देर रात महिला थाने की पुलिस याची व उसकी बेटी को भी थाने ले गई। तीन दिन तक दोनों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। याचिका में कहा गया है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने से पूर्व न तो याची को कोई नोटिस दिया गया और न कोई जानकारी।
रविवार के दिन बड़ी संख्या में पुलिस और पीडीए के अधिकारी व कर्मचारी उसके घर पर दो बुलडोजर लेकर पहुंचे और पूरा मकान ढहा दिया। याची को अपील दाखिल करने के लिए जरूरी 30 दिन की मोहलत भी नहीं दी गई। कहा गया है कि पुलिस की कार्रवाई अवैधानिक और नैसर्गिक न्याय के विपरीत है तथा अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। याचिका में कहा गया है कि याची के पास अब रहने के लिए कोई घर नहीं है। वह परिवार के साथ रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर है।
याचिका में न्यायालय से ग्रीष्मावकाश के दौरान ही इस मामले में सुनवाई का अनुरोध किया गया है। हालांकि, परवीन फातिमा की ओर से दाखिल याचिका में मकान का कोई नक्शा दाखिल नहीं किया गया है। जिसकी स्वीकृति तत्कालीन इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (अब प्रयागराज विकास प्राधिकरण) की ओर से होनी चाहिए। फिलहाल कोर्ट ने मामले कि सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय की है।