कोरांव में एक दिन पहले हुए तिहरे हत्याकांड में फरार चल रहे 10 आरोपी दूसरे दिन भी नहीं पकड़े जा सके। पुलिस उनकी तलाश में लगी रही लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उधर मृतकों के घर में कोहराम मचा रहा। पोस्टमार्टम के बाद देर शाम परिजनों ने तीनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। कोरांव के निश्चिंतपुर गांव में एक दिन पहले चार बीघा जमीन के विवाद में तीन सगे भाइयों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इनमें इंद्रबहादुर, रविंद्र व राम सिंह शामिल हैं।
परिजनों की तहरीर पर कुल 22 लोगों पर नामजद रिपोर्ट लिखी गई थी। जिनमें से 12 रात में ही गिरफ्तार कर लिए गए थे। लेकिन मुख्य आरोपी शिवनारायण समेत 10 अन्य फरार हो गए थे। पुलिस दूसरे दिन भी तलाश में जुटी रही लेकिन इनका कुछ पता नही चला।
बृहस्पतिवार को एडीजी जोन प्रेमप्रकाश व आईजी रेंज केपी सिंह भी गांव पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। साथ ही ग्राम प्रधान मुरारी लाल सहित अन्य ग्रामीणों से पूछताछ की।
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मम्मी कब आएंगे पापा
मृतकों के परिवार में दूसरे दिन भी कोहराम रहा। मृतक राम सिंह का छोटा बेटा बार बार मां सुशीला देवी से पापा के बारे में पूछ रहा था। उधर रविंद्र की बेटी वर्षा व पत्नी गुलाबकली का भी रो-रोकर बुरा हाल था। बच्चों की हालत देख ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गई थीं।
मुंबई से आए थे, नहीं हुई जांच
तिहरे हत्याकांड में मारे गए दो भाइयों की कोरोना संबंधी जांच को लेकर भी लापरवाही की चर्चा है। दरअसल, दोनों छह दिन पहले यानी 14 मई को मुंबई से आए थे। इसके बाद उनकी कोरोना संबंधी जांच नहीं हुई। यहां तक कि पोस्टमार्टम से पहले भी उनकी कोई जांच नहीं कराई गई। इस बारे में एसडीएम संदीप वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पुलिस ने पंचनामे में मृतकों के मुंबई से आने की बात का जिक्र किया होगा तो उनकी कोरोना जांच जरूर हुई होगी।
सीओ मेजा नवीन नायक से बात की गई तो पहले तो उन्होंने यह मानने से ही इंकार कर दिया कि दोनों मुंबई से आए थे। कुछ देर बाद उन्होंने यह बात तो स्वीकार की लेकिन फिर कहने लगे कि वह काफी पहले ही आ गए थे। वहीं, एसपी यमुनापार दीपेंद्रनाथ चौधरी ने बताया कि दोनों की थर्मल स्कैनिंग हुई थी और उनमें किसी तरह के लक्षण न होने की वजह से ही कोरोना जांच नहीं कराई गई। लेकिन सवाल यह भी है कि बहुत से ऐसे भी कोरोना मरीज पाए गए हैं जिनमें लक्षण नहीं थे।