प्रयागराज के गुमनाम शहीदों और कलम के क्रांतिवीरों आदि की गौरव गाथा जाननी है तो उसके लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं। इसके लिए सिर्फ प्रयागराज जंक्शन पहुंचना होगा। यहां प्रयागराज जंक्शन पर देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले कई गुमनाम शहीदों एवं कलम के क्रांतिवीरों से जुड़ी गौरवगाथा प्रदर्शनी के रूप में लगा दी गई है। इसका उद्घाटन सोमवार को उत्तर मध्य रेेलवे (एनसीआर) के महाप्रबंधक प्रमोद कुमार और डीआरएम मोहित चंद्रा ने किया।
आजादी के अमृत महोत्सव आयोजन के तहत रेलवे द्वारा देश के 75 रेलवे स्टेशनों पर एक सप्ताह के लिए ‘ आजादी की रेलगाड़ी और स्टेशन ’ कार्यक्रम शुरू किया गया है। इन 75 स्टेशनों में एनसीआर का प्रयागराज जंक्शन भी शामिल है। जंक्शन पर लगी इस प्रदर्शनी में ऐसे 13 गुमनाम शहीदों की गौरवगाथा दशाई गई है जिनके बारे में आम लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। इन शहीदों में मुख्य रूप से शहीद रामचंद्र, शहीद नियामतउल्लाह, शहीद अब्दुल मजीद, कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला, शहीद मुरारी मोहन भट्टाचार्य, शहीद रमेश मालवीय आदि शामिल है।
इसके अलावा शहीद चंद्रशेखर आजाद, लाल पद्मधर के बारे में भी बताया गया है। कलम के क्रांतिवीरों की बात करें तो प्रदर्शनी में सुमित्रा नंदन पंत, महादेवी वर्मा, प्रेमचंद्र, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, गणेश शंकर विद्यार्थी समेत कुल नौ को नमन किया गया है। इस तरह से यहां गुमनाम शहीद, कलम के क्रांतिवीर एवं अन्य क्रांतिवीर समेत 40 लोगों के बारे में बताया गया है।
एनसीआर के जीएम प्रमोद कुमार ने भी प्रदर्शनी देखने के बाद शहीदों को नमन किया। उन्होंने बताया कि 23 जुलाई तक आम लोगों के लिए प्रदर्शनी खुली है। उसके बाद शहीदों की स्मृतियों को प्रयागराज जंक्शन पर स्थायी रूप से विभिन्न दीवारों पर लगा दिया जाएगा। प्रयागराज जंक्शन पर इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। आरपीएफ के जवानों ने बैंड प्रस्तुति दी।
जवाहर लाल नेहरू और उनके पिता मोती लाल नेहरू को भी मिला स्थान
प्रयागराज जंक्शन पर लगी प्रदर्शनी में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और उनके पिता मोतीलाल नेहरू की भी तस्वीर लगाई गई है। पंडित नेहरू को स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक एवं आधुनिक भारत का निर्माता के रूप में दिखाया गया है। इसके अलावा भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय को भी प्रदर्शनी में स्थान दिया गया है।
प्रयागराज के इन 16 क्रांतिवीर की भी है प्रदर्शनी में है दास्तान
मनमोहिनी जुत्शी सहगल, दुर्गावती देवी उर्फ दुर्गा भाभी, रामानंद चटर्जी, बाबू मंगला प्रसाद, ठाकुर श्रीनाथ सिंह, पदमकांत मालवीय, चिंतामणि घोष, हरिकेशव घोष ‘पटल बाबू’, पंडित अयोध्यानाथ, बालकृष्ण भट्ट, पंडिम माधव शुक्ल, रामरिख सिंह सहगल, डा. ताराचंद, सुखदेव प्रसाद सिन्हा ‘बिस्मिल इलाहाबादी’, तेज बहादुर सप्रू, डा. सतीश चंद्र बनर्जी