फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gyanvapi Case : धार्मिक चरित्र वाली दलील पड़ी मस्जिद पक्ष पर भारी, मसाजिद और वक्फ की सारी याचिकाएं खारिज

Wed, 20 Dec 2023 06:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने दलील को स्वीकारते हुए अंजुमन इंतजामिया मजाजिद कमेटी व सुन्नी वक्फ बोर्ड की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले में सुनवाई के दौरान विश्वेश्वर मंदिर पक्ष की वह दलील मुस्लिम पक्ष पर भारी पड़ गई, जिसमें कहा गया था कि उपासना स्थल अधिनियम-1991 किसी स्थान के धार्मिक चरित्र को तय नहीं कर सकता। यह केवल स्थल के रूपांतरण पर रोक लगाने के लिए है। कोर्ट ने दलील को स्वीकारते हुए अंजुमन इंतजामिया मजाजिद कमेटी व सुन्नी वक्फ बोर्ड की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

विज्ञापन


अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और सुन्नी वक्फ बोर्ड की मुख्य दलीलों का आधार उपासना स्थल अधिनियम था। कमेटी के वकील एसएफए नकवी और वक्फ बोर्ड के पुनीत कुमार गुप्ता ने तर्क रखा था कि इस अधिनियम की धारा-चार के तहत श्रीराम जन्मभूमि को छोड़ कर देश के अन्य किसी भी पूजास्थल के स्वरूप में 15 अगस्त, 1947 के बाद बदलाव नहीं किया जा सकता।  जवाब में मंदिर पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन, विजय शंकर रस्तोगी और अजय कुमार सिंह ने कहा कि उपासना स्थल अधिनियम किसी भी पूजास्थल के रूपांतरण पर रोक लगाने के लिए है। 

हिंदुओं पर वक्फ एक्ट लागू नहीं
हिंदू पक्ष ने कहा, स्मृति व पुराणों के अनुसार सतयुग से आज तक विश्वेश्वर मंदिर सिर्फ मंदिर ही रहा है। पूरा ज्ञानवापी परिसर प्लॉट संख्या 9130, 9131 और 9132 मौजा शहर वाराणसी में स्थित है। इसका रकबा एक बीघा, नौ बिस्वा और छह धूर है। परिसर में ही मुक्ति मंडप, ज्ञान ऐश्वर्य और शृंगार मंडप मौजूद हैं, जहां गणेश्वर, गंगा देवी, हनुमानजी, नंदी, गौरीशंकर, गणेश जी, महाकालेश्वर, महेश्वर, शृंगार गौरी आदि देवी-देवताओं की प्रकट और अप्रकट प्रतिमाएं हैं। वक्फ एक्ट हिंदुओं पर लागू नहीं होता।
विज्ञापन


मस्जिद पक्ष : यह वक्फ की संपत्ति, सुनवाई का अधिकार भी सिर्फ उसी को
मस्जिद पक्ष के वकीलों ने दावा किया कि उपासना स्थल अधिनियम-1991 के चलते जिला अदालत वाराणसी में लंबित ज्ञानवापी से जुड़ा सिविल वाद इस कानून के तहत पोषणीय नहीं है। लिहाजा, सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात और नियम 11 के तहत अर्जी स्वीकार कर वाद निरस्त किया जाए। दीन मोहम्मद केस में विवाद पहले ही तय हो चुका है, इसलिए इस पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। 

मंदिर पक्ष : प्रलय आने पर भी स्वयंभू देवता के धार्मिक चरित्र को नष्ट नहीं कर सकते
मंदिर पक्ष के वकीलों ने दलील दी िक उपासना स्थल अधिनियम की धारा चार घोषित करती है कि पूजास्थल का धार्मिक चरित्र 15 अगस्त, 1947 को जिस रूप में विद्यमान था, उसी स्वरूप में ही रहेगा। हिंदू कानूनों में यह सुस्थापित सिद्धांत है कि मंदिर तय हो जाने पर यह हमेशा मंदिर ही रहेगा। प्रलय आने पर भी स्वयंभू देवता के धार्मिक चरित्र को नष्ट नहीं किया जा सकता है। 

जिला न्यायालय में 24 केस, पहला 1991 में दाखिल
वाराणसी। जिला एवं सत्र अदालत वाराणसी में ज्ञानवापी से जुड़े 24 मामले विचाराधीन हैं। सबसे पुराना मामला 32 वर्ष पुराना है। 2021 से 2023 के बीच ही 23 मामले दाखिल किए हैं।

  • 1991 में दाखिल हुआ था। यह मुकदमा प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वनाथ बनाम अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी और अन्य के नाम से है। इसमें हाईकोर्ट ने मंगलवार को ही फैसला सुनाया है।
  • 2021 में पांच महिलाओं ने मां शृंगार की पूजा-अर्चना से संबंधित मुकदमा दाखिल किया। इसी साल छह अन्य मुकदमे भी दाखिल किए गए।
  • 2022 में विश्व हिंदू महासभा मुख्तार अहमद, प्रभुनारायण और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी समेत 10 मुकदमे दाखिल किए गए।
  • वर्ष 2023 में लॉर्ड आदि विश्वेश्वर, शैलेंद्र पाठक, देवेंद्र पाठक, मुख्तारऔर आदि विश्वेश्वर की ओर से पांच मुकदमे दाखिल किए गए।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें