सावन के सोमवार पर सोमवती अमावस्या को दुर्लभ योग करीब दो दशक बाद पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक यह दिन शिवार्चन के साथ बरगद की पूजा करने वाली महिलाओं के अहम है। वहीं सावन के सोमवार पर देवालयों में अभिषेक, पूजन और शृंगार की तैयारी है।
शहर के मनकामेश्वर मंदिर, शिव कचहरी, पड़िला महादेव, तक्षकेश्वर महादेव, अरैल के सोमेश्वर महादेव सहित अन्य देवालयों में पूजन, शृंगार और दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है। उचित दूरी बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। मनकामेश्वर मंदिर के प्रमुख स्वामी धरानंद के मुताबिक मंदिर दर्शन के लिए सोमवार सुबह सात बजे से खुलेगा।
वहीं सोमवती अमावस्या पर अखंड सुहाग की कामना कर महिलाएं शिव-पार्वती का पूजन-अर्चन करेंगी। पूजन के लिए फूल-अक्षत और दान के लिए शृंगार सामग्री चढ़ाई जाती है। ज्योतिषाचार्य हरिओम शास्त्री के मुताबिक श्रावण मास में आने वाली अमावस्या को श्रावणी अमावस्या भी कहा जाता है। यदि यह सोमवार को पड़े यह सोमवती अमावस्या कई गुना फल देने वाली होती है। यह दुर्लभ संयोग कई दशक बाद आया है।
20 जुलाई को पुनर्वसु नक्षत्र, सोमवार के दिन अमावस्या के साथ पुष्कर योग बन रहा है। उन्होंने बताया कि पुष्कर योग में शिव पूजन करने से अखंड सौभाग्य, विवाह, धनधान्य, संतान और सेहत का सुख मिलता है। सोमवती अमावस्या पर तीर्थ स्थान के दर्शन और पवित्र नदी में या गंगा स्नान, दान, जप करना शुभ माना जाता है। महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए बरगद की परिक्रमा कर सूत की फेरी देती हैं। यह विशेष फलदायी है।
गंगा-यमुना का जल स्थिर, आज लगेगी डुबकी
सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान करने वालों के लिए राहत भरी खबर है। गंगा-यमुना का जल रविवार शाम से स्थिर है। दिन में फाफामऊ में गंगा चार घंटे में सिर्फ दो सेंटीमीटर बढ़ीं। वहीं छतनाग में गंगा और नैनी में यमुना का जल स्थिर रहा। गंगा घाटों पर स्नानार्थियों की सुविधा के लिए पुरोहितों ने विशेष व्यवस्था की है। कटान वाले क्षेत्रों को फावड़े से समतल कर सीढ़ियां बनाई गईं। तीर्थ पुरोहित बलराम के मुताबिक सोमवार और साथ में अमावस्या पर स्नान दान का विशेष महात्म्य है। सिंचाई विभाग के बाढ़ प्रखंड के मुताबिक रात आठ बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 78.090 मीटर, छतनाग (झूंसी) में 73.500 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 74.05 मीटर रहा।