डर के 50 लाख रुपयों के विवाद में वारदात
पुलिस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि टेंडर के 50 लाख रुपयों के विवाद में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। यह बात सामने आई है कि वीरेंद्र व अन्य दोनों आरोपी ठेकेदारी करते थे। पिछले दिनों धूमनगंज के टीपी नगर और कैंट के गंगानगर में तीनों ने महेंद्र की फर्म के नाम से हुए पीडब्ल्यूडी के टेंडर पर मिलकर काम कराया था। इसी से संबंधित 50 लाख रुपयों को लेकर उनमें विवाद चल रहा था। इसी विवाद में उसकी हत्या कर दी गई।
फोन कर बुलाया था घर से
सूत्रों का कहना है कि पुलिस की जांच पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि ठेकेदार को घर से बुलाकर मारा गया। आरोपियों ने फोन कर उसे घर से बुलाया था। इसके बाद ही यह वारदात हुई। गौरतलब है कि वारदात के बाद प्रारंभिक जांच पड़ताल में आशंका जताई जा रही थी कि तीनों मौके पर बैठकर शराब पी रहे थे। हालांकि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हो गया कि ठेकेदार को प्लानिंग से बुलाया गया था।
नियमविरुद्ध तरीके से रखे था तीन लाइसेंसी असलहे
हत्याकांड की जांच पड़ताल के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी राजेश ने नियमविरुद्ध तरीके से तीन लाइसेंसी असलहे अपने पास रखे हुए थे। इनमें से एक पिस्टल, एक राइफल व एक डीबीबीएल का लाइसेंस है। खास बात यह है कि दिसंबर 2019 में ही क्रेंदीय गृह मंत्रालय की ओर से आयुध अधिनियम में संशोधन किया गया था। जिसके मुताबिक एक व्यक्ति दो से ज्यादा लाइसेंसी असलहे नहीं रख सकता और अगर ऐसा है तो उसे तीसरा असलहा सरेंडर करना होगा। अब सवाल यह भी है कि आखिर कैसे पुलिस व प्रशासन की नजरों से वह बचा रहा। मामले में अफसरों का कहना है कि फिलहाल लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में उस पर एक और मुकदमा कैंट थाने में दर्ज किया जा रहा है।
सात गोलियां मारी थीं दोस्तों ने
पोस्टमार्टम में इस बात का खुलासा हुआ है कि मृतक वीरेंद्र को कुल सात गोलियां मारी गई थीं। सभी गोलियां उनके शरीर में फंसी मिलीं। दो डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच शव का पोस्टमार्टम किया।
प्रयागराज : दोस्त ने ठेकेदार को गोली से उड़ाया, लाइसेंसी पिस्टल से एक के बाद एक पांच गोलियां मारीं