प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन में अधिकतम 75 फीसदी अंक की अनिवार्यता से भड़के छात्रों ने कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज के प्राचार्य कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की। इस दौरान गेट का शीशा टूटकर एक छात्र के हाथ में धंस गया और उसके हाथ की नस कट गई। छात्र को गंभीर हालत में एसआरएन अस्पताल भेजा गया, जहां से उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। छात्र की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय ने प्रैक्टिकल में अधिकतम 75 फीसदी अंक की बाध्यता अनिवार्य कर दी है और इससे अधिक अंक देने पर शर्त रख दी है कि इन परिस्थितियों में अंक केवल ऑफलाइन दिए जाएंगे और कॉपियां सीधे राज्य विश्वविद्यालय को भेजी जाएंगी, जहां अलग से इसकी जांच होगी। कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज में 15 मई से बीएससी कृषि और एमएससी कृषि की सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं। इन दोनों पाठ्यक्रमों के तमाम छात्र शनिवार सुबह प्राचार्य कार्यालय पहुंच गए और प्राचार्य से मांग करने लगे कि इस व्यवस्था को समाप्त किया जाए, क्योंकि योग्य छात्रों को इससे काफी नुकसान होगा और उनके कॅरियर पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
प्राचार्य ने असमर्थता जताते हुए कहा कि इस बाबत उन्हें राज्य विश्वविद्यालय से कोई लिखित सूचना नहीं मिली है और सब कुछ राज्य विश्वविद्यालय के हाथ में है, इसलिए वह कुछ नहीं कर सकते। छात्र नहीं माने और वहीं डटे रहे। इस पर प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार ने छात्रों को पुलिस बुलाकर वहां से हटाने की चेतावनी दी, जिससे छात्र भड़क गए और तोड़फोड़ शुरू कर दी। प्राचार्या कार्यालय का गेट तोड़ दिया गया। आसपास रखे सामान भी उठाकर फेंक दिए गए। तोड़फोड़ के दौरान गेट पर लगा कांच टूटने से हंडिया के रहने वाले बीएससी कृषि तृतीय सेमेस्टर के छात्र स्वराज सिंह के दाएं हाथ की नस कट गई और तेजी से खून बहने लगा। गंभीर हालात में अन्य छात्र उसे एसआरएन लेकर भागे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद से अलका हॉस्पिटल ले जाया गया।
कॉलेज प्रशासन ने की घायल छात्र की मदद
घटना के बाद शाम के वक्त छात्र फिर प्राचार्य कार्यालय पहुंच गए और वहां प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार का घेराव शुरू कर दिया। छात्र इस मांग पर अड़े थे कि प्राचार्य खुद अस्पताल जाकर घायल छात्र से मिलें। छात्रों की मांग पर प्राचार्य अस्पताल पहुंचे और वहां छात्र के इलाज के लिए आर्थिक सहयोग भी दिया। कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. आरए अवस्थी ने बताया कि छात्र के लिए इलाज के लिए 24 हजार रुपये दिए गए हैं।
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- फोटो : प्रयागराज
आंतरिक मूल्यांकन में अधिकतम अंकों की कोई अनिवार्यता नहीं है। किसी ने छात्रों को गलत सूचना दे दी। केवल प्रैक्टिकल में अधिकतम 75 फीसदी अंक की अनिवार्य लागू की गई है। अगर किसी परीक्षक को लगता है कि छात्र 75 फीसदी से अधिक अंक पाने के योग्य है तो अंक ऑफलाइन दिए जाएंगे और संबंधित छात्र की कॉपियां सीधे राज्य विवि को भेजी जाएंगी। कॉपियों का अलग से परीक्षण होगा और परीक्षक से भी कारण पूछा जाएगा। -डॉ. विनीता यादव, परीक्षा नियंत्रक, राज्य विश्वविद्यालय
राज्य विवि को शिकायत मिली थी कि कई कॉलेज में बाह्य परीक्षकों के न आने के बावजूद प्रैक्टिकल कराकर मनमाने तरीके से अंक दिए जा रहे हैं। इसी आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिकतम 75 फीसदी अंकों की अनिवार्यता लागू की। प्रैक्टिकल के अंक ऑनलाइन चढ़ाए जाने हैं। अगर 75 फीसदी से अधिक अंक दिए जाते हैं तो अंक ऑनलाइन दर्ज नहीं हो सकेंगे। इसके लिए अलग से ऑफलाइन अंक देने होंगे। इस बार प्रैक्टिकल के दौरान आंतरिक एवं बाह्य परीक्षक और छात्रों की ग्रुप फोटो भी ऑनलाइन अपलोड की जा रही हैं, ताकि इस बात का सुबूत रहे कि संबंधित छात्र और परीक्षक प्रैक्टिकल के दौरान मौजूद थे।
प्रैक्टिकल में अंकों की अनिवार्यता संबंधी व्यवस्था के विरोध में छात्रों और शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अन्य अफसरों से अलग-अलग मुलाकात की थी। राज्य विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्षा पीके सिंह और महामंत्री पीके पचौरी ने कुलपति से मिलकर मांग की थी कि इस व्यवस्था को समाप्त किया जाए, क्योंकि इससे योग्य छात्रों का नुकसान होगा और कॅरियर भी प्रभावित होगा लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।