निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत आशीष गिरि की दो साल पहले संदिग्ध हाल में हुई मौत का राज भी अब जल्द ही खुल सकता है। नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में गिरफ्तार आनंद गिरि पहले ही इसे हत्या बताकर जांच की मांग कर चुके हैं। और अब उसके अधिवक्ता की ओर से इस मामले में दारागंज थाने में तहरीर दी गई है।
महंत आशीष गिरि की मौत 17 नवंबर 2019 को निरंजनी अखाड़े के दारागंज स्थित आश्रम में हुई थी। वह अपने कमरे में संदिग्ध हाल में मृत पड़े मिले थे। पुलिस ने इसे सुसाइड बताया था लेकिन मौके की स्थितियों को लेकर पुलिस की थ्योरी पर सवाल भी खड़े हो गए थे। तमाम संगठनों के साथ ही आनंद गिरि ने भी इसे हत्या का मामला बताते हुए जांच की मांग की लेकिन पुलिस की ओर से एफआईआर तक नहीं दर्ज की गई।
दारागंज पुलिस से लेकर आला अफसर तक सभी इसे खुदकुशी ही बताते रहे। लीपापोती का आलम यह कि मामले में अब तक मौके से बरामद पिस्टल की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट भी नहीं आई। गुरु से विवाद के बाद आनंद गिरि ने आशीष गिरि की हत्या किए जाने का आरोप लगाकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी और इसके बाद ही अखाड़े के भीतर संपत्ति को लेकर विवाद की बातें उठने लगीं। नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में मौत के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया और अब इसकी जांच को लेकर फिर मांग तेज हो गई है।