जिले में देशी शराब के दुकानदारों को अगले पांच दिनों के भीतर करीब पांच करोड़ रुपये की शराब बेचनी होगी। लॉकडाउन के चलते बंदी की मार झेल रहे अनुज्ञापियों को पिछले वर्ष के कोटे से बचा हुआ स्टॉक खत्म करने के लिए सरकार ने सात दिनों की मोहलत दी है। जिले में देशी शराब के निर्धारित कोटे के हिसाब से देखा जाए, तो अगले पांच दिनों के लिए यह आंकड़ा पांच करोड़ के आसपास ठहरता है।
22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन से ही जिले में शराब की दुकानें बंद हैं। सामान्य दिनों मेें 31 मार्च तक दुकानदारों को अपना स्टॉक खत्म करना होता है। लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते आखिरी कुछ दिनों में दुकानदार शराब की बिक्री नहीं कर सके। ऐसे में उनके पास करोड़ों रुपये का स्टॉक बचा रह गया।
दुकानदारों की इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों से देशी शराब के बचे हुए स्टॉक की जानकारी मांगी थी। जिसके हिसाब से तय किया गया कि औसतन सात दिन का स्टॉक दुकानदारों के पास बचा है। इसी आधार पर तय हुआ कि दुकानें खुलने के सात दिनों के भीतर बचा हुआ स्टॉक खत्म करना होगा।
देशी शराब के लिए पिछले साल जिले का कोटा 1.04 करोड़ लीटर का था। इस हिसाब से एक दिन की बिक्री का कोटा 28493 लीटर के आसपास होता है। सात दिनों के हिसाब से यह आंकड़ा लगभग 1.99 लाख लीटर होता है। जानकारों का कहना है कि 325 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से देखें तो यह आंकड़ा 6.48 करोड़ रुपये होता है। अब तीन व चार मई को न्यूनतम 75 लाख रुपये प्रतिदिन की बिक्री मान लें तो दो दिन में करीब डेढ़ करोड़ की देशी शराब जिले में बिक चुकी है। ऐसे में लगभग पांच करोड़ की बची हुई देशी शराब अगले पांच दिनों में दुकानदारों को बेचनी होगी।
अंग्रेजी के दुकानदारों को मिलती है राहत
आबकारी विभाग के अफसरों का कहना है कि अंग्रेजी शराब के दुकानदारों को इस मामले में राहत मिलती है। दरअसल तय अवधि में स्टॉक न खत्म कर पाने की दशा में उनके पास रोलओवर शुल्क देकर बचा हुआ माल अगले वित्तीय वर्ष में बेचने की सुविधा होती है। जबकि देशी शराब के मामले में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती। तय अवधि तक स्टॉक न खत्म होने पर बचा हुआ माल नष्ट करा दिया जाता है।
418 कुल दुकानें हैं जिले में देशी शराब की
4 मई से जिले में शुरू हुई है शराब की बिक्री
10 मई तक खत्म करना है बचा हुआ स्टॉक