सपा की पूर्व विधायक विजमा यादव का भाई राम लोचन भूमाफिया घोषित होने के बाद से ही फरार चल रहा है। उस पर धूमनगंज, कैंट और करेली के अलावा कौशांबी के पिपरी थाना क्षेत्रों में 39 मुकदमे दर्ज हैं। कैंट थाने में उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई है। राम लोचन ने गंगापार और धूमनगंज क्षेत्रों में प्लाटिंग और जमीन की खरीद फरोख्त करके करोड़ों की संपत्ति बनाई है। पीडीए ने सोमवार को उसकी दो संपत्तियों पर कार्रवाई की है, जिनकी कीमत भी कई करोड़ है। लोचन की अन्य संपत्तियों का भी पता लगाया जा रहा है।
जवाहर पंडित की मौत के बाद जब विजमा राजनीति में उतरीं तो राम लोचन उनका काम देखने लगा। शुरू से ही दबंग प्रवृत्ति का लोचन जल्द ही आपराधिक दुनिया पर छा गया। वह नगर निगम और रेलवे की ठेकेदारी में उतरा तो ठेके को लेकर कई बार गोलियां चल गईं। रेलवे के ठेके को लेकर एक बार अतीक अहमद गिरोह से ही उसकी ठन गई।
उस समय रेलवे के ठेकों में अतीक गिरोह की तूती बोलती थी। 2005-06 में दोनों के बीच मामला इतना बढ़ गया कि सपा हाईकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा था। इसके बाद रेलवे के ठेकों से अतीक ने हाथ पीछे खींच लिया था। रेलवे के साथ ही नगर निगम के ठेकों पर भी लोचन ने जल्द ही एकाधिकार कर लिया। इसके साथ ही वह जमीन की खरीद फरोख्त का धंधा भी करने लगा। गंगापार और धूमनगंज क्षेत्रों में जमीन के धंधे से उसने खूब दौलत बटोरी। उसका गिरोह विवादित जमीनों में हस्तक्षेप करने करने लगा।
झूंसी समेत गंगापार के तमाम इलाकों से जमीन की समस्या सुलझाने के लिए लोग पुलिस के पास नहीं, बल्कि राम लोचन के पास जाते थे। पैसे कमाने के साथ-साथ राम लोचन के खिलाफ मुकदमों की संख्या भी बढ़ने लगी। धूमनगंज, पिपरी, करेली और कैंट में उसके खिलाफ 39 मामले चल रहे हैं। उसकी हिस्ट्रीशीट कैंट में खोली गई है। 2017 में भाजपा सरकार ने भूमाफिया की सूची तैयारी की, जिसमें आठवें स्थान पर उसका नाम दर्ज था। इस सूची के जारी होने के बाद लोचन अंडरग्राउंड हो गया।