इस बार कड़ाके की सर्दी पड़ने की संभावना है। इसकी वजह से बच्चों में सर्दी-जुकाम, बुखार के कारण कान में असहनीय दर्द की समस्या बढ़ने लगी है। खासतौर से दो से लेकर आठ वर्ष तक के बच्चों में अधिक परेशानी देखने को मिल रही है। वहीं पिछले चार से पांच दिनों के भीतर कान में दर्द की समस्या में इजाफा हुआ है। ऐसे में बच्चों के हाथ-पैर, कान व सिर ढककर रखने की आवश्यकता है।
सामान्य दिनों में जहां दो से तीन बच्चे स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय के ईएनटी विभाग (नाक, कान, गला विभाग) में आते हैं। वहीं, अब 15 से 20 बच्चे प्रतिदिन उपचार कराने आ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि रात भर कान में दर्द की वजह से बच्चे सो नहीं पाते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इस प्रकार की समस्या से राहत मिलने में बच्चों को 15 दिन से अधिक का समय लग रहा है।
इसलिए होती है समस्या
सर्दियों में बच्चों के कान में दर्द होने का मुख्य कारण सर्दी-जुकाम, फ्लू जैसे संक्रमण हैं जिससे यूस्टेशियन ट्यूब (कान को गले से जोड़ने वाली नली) में सूजन और तरल पदार्थ जमा हो जाता है जो बैक्टीरिया के पनपने की वजह बनता है और दर्द व दबाव पैदा करता है। साथ ही, ठंडी हवा और शुष्क मौसम भी कान की नलिकाओं में जलन और संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं। क्योंकि बच्चों के कानों की नलिकाएं छोटी और कम ढलान वाली होती हैं, इसलिए इनमें संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।
ऐसे करें बचाव
बच्चों के कानों को टोपी या इयरमफ से ढकें, गर्म और सूखा रखें, फ्लू के टीके लगवाएं, भरपूर विटामिन सी और पानी दें और घर में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें, ताकि नमी बनी रहे और सर्दी-जुकाम के कारण होने वाले कान में दर्द से बचाव हो सके। अगर दर्द हो तो सिकाई करें और डॉक्टर की सलाह से दवा दें, लेकिन रुई के फाहे कानों में न डालें।
पिछले कुछ दिनों से बच्चों में कान में दर्द की समस्या में इजाफा हुआ है। वहीं इस साल अधिक सर्दी पड़ने की संभावना है। इसलिए बच्चों के कान व सिर को अच्छे से ढककर रखें क्योंकि सर्दी-जुकाम व बुखार की वजह से होने वाली कान में दर्द की समस्या को ठीक होने में 15 से दिन से अधिक का समय लग रहा है।
- डॉ. सचिन जैन, ईएनटी विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज