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गिरोह कैसे करता है काम
सीओ सोरांव केवी अशोक ने बताया कि छेमार गिरोह बेहद नृशंस तरीके से वारदात को अंजाम देने के लिए कुख्ख्यात है। गिरोह के सदस्य अलग-अलग शहरों मेें जाकर ग्रामीण क्षेत्रों में अपना डेरा बनाते हैं। इसके बाद दिन में घूम-घूमकर भीख मांगने के साथ रेकी करते हैं जबकि रात में आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं।
गिरफ्तार
सारिक पुत्र रफीक
शाहरुख पुत्र अली
डाबर पुत्र अशरफ
वारिश खान पुत्र जफर
फरमान पुत्र आलमदीन सभी निवासी थाना पटवारी, जिला रामपुर
राजस्थान व उत्तराखंड में भी मुकदमे
- पुलिस ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों में से तीन का आपराधिक इतिहास भी है। गिरोह ने प्रदेश के साथ ही राजस्थान व उत्तराखंड में भी वारदातें अंजाम दी। गिरेाह के सदस्यों पर दर्ज केस की बात करें तो अब तक छह मुकदमों की जानकारव्ी मिली है। जिनमें से दो बंदायू, एक राजस्थान के भरतपुर, एक उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर व एक-एक मुकदमे क्रमश: फतेहगढ़ व फर्रुखाबाद में दर्ज हैं।
बरामदगी
- एक चापड़, एक कुल्हाड़ी, दो चाकू, मृतक विमलेश का मोबाइल व टूटा हुआ सिम और 8900 रुपये