थाना सराय ममरेज क्षेत्र के सेमरी गांव के राम प्यारे पुत्र दुखरन पटेल 60 वर्ष चार भाइयों में तीसरे नंबर का था जो घर पर रह कर खेती किसानी के भरोसे अपने चार बच्चों का भरण पोषण पत्नी के सहयोग से करता था। बुधवार सुबह करीब साढे 5 बजे जोरदार हो रही बरसात के पानी से घर के बगल खेत में धान की रोपाई करने हेतु मेड दुरूस्त कर रहा था।
उसी समय जोरदार बादलों के गड गडाहट के साथ कुछ ही दूरी पर गिरी बिजली के चमक से हार्ट पर पड़े दबाव के चलते तुरंत मौत हो गई। जानकारी मिलते ही रोते बिलखते मौके पर पहुंची पत्नी पार्वतीव चार बच्चों के साथ घर गांव के लोगों ने आनन-फानन में खेत से उसे घर पर ले आए घटना की जानकारी उपजिलाधिकारी हंडिया को देने पर आए राजस्व टीम के समक्ष स्थानीय पुलिस अमरनाथ यादव प्रतापपुरजहां एक तरफ लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं घर के मुखिया की मौत से पत्नी व बच्चों का रो रो कर बुरा हाल हो रहा है।
बाइक सवार ने खड़ी ट्रक ने मारी टक्कर ,घायल
कस्बे में खड़ी ट्रक में पीछे से आ रहे एक बाइक सवार ने जोरदार टक्कर मार दी जिससे बाइक पर बैठे दोनों युवक घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को पास स्थित अस्पताल में भर्ती करा दिया। बुधवार की शाम सैदाबाद चौराहे पर एक हाथी पर बैठे महावत द्वारा आने जाने वाली गाड़ियों से पैसा लिया जा रहा था।
हाथी को देखकर कई वाहन खड़े हो गए जिससे चौराहे पर भीड़ लग गई। ढोकरी गांव निवासी धीरज कुमार पुत्र दिलीप कुमार अपने साथी बिपिन कुमार के साथ हंडिया से बाइक से लौट रहा था। पीछे से खड़े ट्रक में टक्कर मार दी। जिससे उसके सिर में चोट लग गई। उसे स्थानीय लोगों ने अस्पताल में भर्ती करा दिया।
प्राइवेट अस्पताल में मानक की अनदेखी, बीमारी फैलने का खतरा
प्रयागराज लखनऊ हाईवे थाना नवाबगंज के जलालपुर चांधन उर्फ पीथीपुर गांव स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम में देश में फैली महामारी के बावजूद सामाजिक दूरी व शासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का खुला माहौल उड़ाया जा रहा है। बेपरवाह व्यवस्था के चलते मरीज के साथ तीमारदारों को किसी भी समय खतरनाक बीमारी होने से नकारा नहीं जा सकता शुक्रवार की शाम अस्पताल में देखा गया कि महिला पुरुष सामूहिक वार्ड में भर्ती रोगियों के साथ तीमारदार व देखने वाले बिना मास्क लगाए काफी भीड़ लगाए हुए थे।
अस्पताल संचालक की लापरवाही के कारण मरीजों का इलाज करने वाली नर्सेज व अन्य कर्मचारी असुरक्षित देखे गए ।इस बाबत डॉक्टर से बात करने की कोशिश की गई लेकिन जवाब देने से इनकार किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार नवाबगंज व कौड़िहार के आसपास की तकरीबन सभी निजी अस्पताल व नर्सिंग होम की ओपीडी समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर दी गई है। लेकिन बगैर अस्पताल का बोर्ड लगाए नर्सिंग होम संचालक मरीजों समेत अपने कर्मचारियों की जान जोखिम में डालकर धन कमाई में लिप्त है। विडंबना यह है कि राजमार्ग पर संचालित नर्सिंग होम के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई नाकाम साबित हो रही है।