एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी नजूल भूमि को लेकर नीति नहीं बन पाई। इसकी वजह से फ्री होल्ड के लिए पहुंचे दो हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। इससे लीज पर भवन लेने वालों के सामने दुविधा की स्थिति है। सैकड़ों लोगों की तो जमीन भी फंस गई है। इसके अलावा शहर का विकास भी प्रभावित हो गया है।
जिले में नजूल के अंतर्गत हजारों भूखंड एवं बंगले हैं। ज्यादातर भूखंडों एवं बंगलों को शहरियों ने लीज पर ले रखा है। 1994 के बाद इनके फ्री होल्ड कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में शहरियों में जमीन एवं बंगले फ्री होल्ड करा लिए लेकिन विवादों को देखते हुए सरकार की ओर से नई नीति बनाने की घोषणा की गई है।
इसकी वजह से सरकार ने जुलाई 2020 से नजूल भूखंड के फ्री होल्ड कराने के साथ अन्य सभी तरह की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इसकी वजह से फ्री होल्ड कराने के लिए आवेदन करने वाले दो हजार से अधिक शहरियों में निराशा है। कई भूखंडों के लिए तो एक से अधिक लोगों आवेदन किया है लेकिन अब निराशा है।
जिला प्रशासन के सूत्र के अनुसार प्रदेश सरकार की ओर से नीति तैयार कर ली गई है। स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है लेकिन अभी मामला सिर्फ आपत्तियों और संशोधनों तक सिमटा हुआ है। वहीं एडीएम नजूल प्रदीप कुमार यादव का कहना है कि नजूल भूमि को लेकर सभी तरह की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। अभी नई नीति नहीं आई है। सरकार के निर्देश के क्रम में आगे प्रक्रिया शुरू की जाएी।
शहर का विकास प्रभावित
नजूल भूमि को लेकर नीति नहीं आने से शहर का विकास भी प्रभावित हो गया है। 50 से अधिक भूखंडों एवं बंगलों की लीज वर्षों पहले खत्म हो चुकी है। प्रशासन की ओर से इनके अधिग्रहण की नीति बनाई गई है। इन भूखंडों पर पार्किंग समेत कई अन्य निर्माण कार्य होने हैं लेकिन रोक लगने की वजह से सारे काम रुक गए हैं। इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि स्मार्ट सिटी के तहत शहर में कई जगहों पर पार्किंग बनाए जाने हैं लेकिन जमीन की तलाश ही पूरी नहीं हो पा रही।
व्यक्तिगत निर्माण रुके, राजस्व को भी नुकसान
लीज पर लिए गए कई बड़े भूखंडों और बंगलों के स्थान पर अपार्टमेंट, मॉल आदि बनाने की योजना बनाई गई है। इन भूखंडों को फ्री होल्ड कराने के लिए आवेदन भी किया गया है लेकिन नीति नहीं होने की वजह से इसकी प्रक्रिया भी रुकी हुई है। इससे प्रशासन को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
सड़क चौड़ीकरण का काम प्रभावित
स्मार्ट सिटी योजना के तहत कई मार्गों का चौड़ीकरण एवं सुंदरीकरण किया जा रहा है। इसके लिए सड़क के किनारे की जमीन अधिग्रहित भी की गई है। यह प्रक्रिया अब भी जारी है। कई स्थानों पर नजूल के भूखंड भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं। जबकि, भवन स्वामियों ने फ्री होल्ड के लिए आवेदन कर रखा है। ऐसे में नजूल भूमि को लेकर नीति नहीं होने की वजह से इन भूखंडों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इससे सड़क चौड़ीकरण का काम भी प्रभावित हो गया है।