नवाबगंज में हुई सनसनीखेज वारदात के बाद जिले में ‘रिश्तों के कत्ल’ की पूर्व में हो चुकी कई वारदातों की यादें एक बार फिर लोगों के जेहन में कौंध गईं। यह वह घटनाएं थीं जिनमें अपने ही अपनों के कातिल बने। कहीं घरेलू कलह वजह बनी तो किसी मामले में आर्थिक तंगी के चलते यह कदम उठाए गए। कुछ मामले ऐसे भी रहे जिनमें शक के चलते न सिर्फ रिश्ते बिगड़े बल्कि निर्दोष जिंदगियां भी फना हो गईं।
prayagraj murder
- फोटो : अमर उजाला
- 16 मई 2020 को पड़िला स्थित ग्रुप कमांड सेंटर में सीआरपीएफ जवान विनोद कुमार यादव ने पत्नी विमला यादव, बेटे संदीप और बेटी सिमरन की हत्या कर खुदकुशी कर ली थी। उसने तीनों को पहले गोली से उड़ा दिया और फिर फांसी पर लटक गया था।
- 27 अक्तूबर 2019 को पुलिस लाइन स्थित सरकारी क्वार्टर में रहने वाले गोविंदनारायण ने पत्नी चंद्रा देवी और बेटे सोनू की हत्या करने के बाद फंदे पर लटककर जान दे दी थी। पुलिस विभाग में फॉलोअर गोविंदनारायण ने घरेलू कलह और बीमारी से तंग आकर उसने यह कदम उठाया था।
- 25 मार्च 2021 को घूरपुर के बलापुर गांव में रहने वाले सरवन ने पहले अपनी पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद पेड़ पर बनाए फंदे से लटककर जान दे दी। दोनों के शव कुछ दूरी पर मिले। पत्नी की हत्या से पहले उसने पुलिस को फोन कर जुर्म कबूला और यह भी कहा कि वह जान देने जा रहा है।
- 21 अगस्त 2018 को धूमनगंज केपीपलगांव में रहने वाले मनोज कुशवाहा ने पत्नी श्वेता व तीन बेटियों सृष्टि, शिवानी और श्रेया की हत्या कर खुदकुशी कर ली। फांसी के फंदे पर लटकने से पहले उसने पत्नी व बेटियों को मारकर उनकेशव रेफ्रिजरेटर, आलमारी व सूटकेस में छिपा दिए थे।